IQNA

فِيهِ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ مَقَامُ إِبْرَاهِيمَ وَمَنْ دَخَلَهُ كَانَ آمِنًا وَلِلَّهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلًا وَمَنْ كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ उनमें स्पष्ट संकेतों हैं [दया, कृपा, ईश्वर की दया और सहित] इब्राहीम का मक़ाम है; और जो भी इसमें प्रवेश करता है वह सुरक्षित है, और अल्लाह के लिऐ लोगों पर हज वाजिब है जो इसकी शारीरिक स्वास्थ्य और वित्तीय क्षमता रखता है और जो कोई भी इंकार करे [और न जाऐ क़ुदरत रखने के बबा ववजूद] भगवान को दुनिया की जरूरत नहीं है। सूर आले-इमरान /आयतः 97

अम्ने इलाही की जगह