ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) अयातुल्ला मोहम्मद अली तस्ख़ीरी मुस्लिम धार्मिक सन्निकटन विश्व विधानसभा के जनरल सचिव,ने कल सुबह,2 मई को,तीसरे सम्मेलन" हिक्मते मुतह्हरी' में 'इस्लामी सोच की बहाली और जागरण हिक्मते मुतह्हरी में"विषय के साथ जो कि Hosseinieh Zahra (SA) इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन हॉल में आयोजित किया गया था मुस्लिम समुदाय के बीच इस्लामी जागृति में शहीद Motahhari की सोच की भूमिका की चर्चा करते हुए इस्लामी जागृति में इस मास्टर शाहिद की सोच और शाहिद सद्र की सोच में समान्ता बताई और कहा:जब कि दोनों ने एक दूसरे को देखा तक नही था लेकिन कई विचारों और सोच के क्षेत्रों में ऐक जैसे थे.
उन्हों नेआगे सत्रहवीं शताब्दी में तुर्क शासन के दौरान मुसलमान समुदायों के बीच इस्लामी जागृति की ऐतिहासिक जड़ों और उसी समय मुसलमानों के बीच इस्लामी जागृति के फीका पड़ जाने की ओर इशारा किया और कहा: उस अवधि में मुस्लिम विश्व अज्ञानता में गुज़र बसर कर रहा था,लेकिन बीस्वीं सदी के शुरू होने के साथ सैयद जमालुद्दून Asadabady व शेख मोहम्मद अब्दह जैसे लोग वह पहली ऐसी इस्लामी शख़्सियतें थी जिन्हों ने इस लहर के अग्रणी की हैसीयत और इस सोच के समर्थक के रूप में आगे बढ़े.
मुस्लिम धार्मिक सन्निकटन विश्व विधानसभा के जनरल सचिव ने जारी रखते हुऐ आगे कहा कि मुस्लिम समुदायों के बीच इस्लामी जागृति आंदोलन को खत्म करने के रास्ते में उपनिवेशण(इस्तेमार)के तीन मुख्य लक्ष्य धर्मनिरपेक्षता,मुस्लिम देशों के बीच अलगाव और इस्लामी दुनिया के देशों को पीछे ढकेल देना था,और आगे कहा:इस्लामी क्रांति के आगमन के साथ उपनिवेशवाद के सभी नक्शे पानी पर बह गऐ थे और यह महान क्रांति उस समय आई जब मुसलमानों की निराशा व नउम्मादी ऊंचाई पर थी.
उन्होंने जारी रखते हुऐ कहा: कि इस वर्णन के साथ हम कह सकते हैं कि इमाम खुमैनी (र.) का सबसे बड़ा लक्ष्य इस्लामी जागरण था कि वर्तमान समय में महत्वपूर्ण और मूल्यवान माना जाऐगा.
इसी तरह इस्लामी सम्मेलन की शुरुआत में Mohsen इस्लामी, इस्लामिक रिलेशन्स संस्कृतिक संगठन के प्रमुख के परामर्श और कार्यालय क्षेत्र में महानिदेशक ने क्षेत्र में इस्लामी जागृति के साथ सटीक रिश्ते की ओर इशारा करते हुऐ ईरानी क्रांति से उत्पन्न राजनीतिक प्रवचन के साथ मुस्लिम विश्व में इस्लामी जागृति की जड़ पर बात की.
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