फ्रांस में रह रहे इस्लामी विद्वान श्री साम्बा दयानी ने ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) को दिऐ गऐ विशेष साक्षात्कार में कहा है कि आपत्तिजनक फिल्म की प्रदर्शनी में सह्योनी तो बहुत आगे आगे हैं. ऐसी फिल्म जो सन 2011 में बनाई जाती है और उसे 11 सितम्बर के निकट प्रकाशित किया जाता है और मुसलमानों के विरोध में अमेरिकी राजदूत मारा जाता है. इन घटनाओं की रोशनी में अच्छी तरह उजागर हो जाता है कि किस तरह इजराइल का हाथ आपत्तिजनक फिल्म की प्रदर्शनी में स्पष्ट है.
दयानी ने कहा है कि इसराइल का उद्देश्य यह है कि मुसलमान इस आपत्तिजनक फिल्म की रिलीज पर भावनात्मक ढंग से विरोध करें और आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हो कर तोड़फोड़ करे ताकि इसराइल अपने उद्देश्य में सफल हो सके, इसलिए इन हालात में मुसलमानों को चाहए कि वह एकता का प्रदर्शन करें और शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध और प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखें.
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