IQNA

15:03 - January 01, 2020
समाचार आईडी: 3474295
अंतर्राष्ट्रीय समूह - चीनी अधिकारी वर्ष 2019 में जो चला गया- देश के पूजा स्थलों से इस्लामी और ईसाई प्रतीकों को हटाने की अपनी नीति का विस्तार किया है।
IQNA की रिपोर्ट बेतर Winter के अनुसार; चीन में चल रहे इस्लामिक और ईसाई स्मारकों से धार्मिक प्रतीकों को हटाने का काम इतना व्यापक हो गया है कि भविष्य में इन स्थानों को ज़ाहिरी शक्ल से पहचानना मुश्किल होगा। अब इन पूजा केंद्रों की वास्तुकला पारंपरिक चीनी वास्तुकला की अन्य इमारतों से मिलती-जुलती है इस तरह कि वे अन्य इमारतों से आसानी से अलग न होंसकें।
 
कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों ने झिंजियांग और अन्य मुसल्मान क्षेत्रों में इस्लाम के चीनीकरण करने के पंचवर्षीय योजना के शुभारंभ के चलते आदेश दिया कि सभी इस्लामी स्थापत्य स्मारकों को बदल दिया जाऐ और उनके इस्लामी प्रतीकों को हटा दिया जाऐ।
 
जुलाई की शुरुआत में, चीन के हेनान प्रांत में सिंधियन शहर की एक मस्जिद के अधिकारी को का आदेश दिया कि गुंबद और मस्जिद की छत पर चाँद और सितारा का निशान छुपा दे। लेकिन उसके बाद सरकारी अधिकारियों ने कहा कि यह कदम पर्याप्त नहीं है और प्रतीकों को पूरी तरह से हटा दिया जाना चाहिए।
 
इसी तरह की कार्रवाई उसी प्रांत के जिजी गांव में मस्जिद में की गई थी, जिसमें चीनी प्रतीकों को इस्लामी प्रतीकों की जगह प्रतिस्थापित किया गया था। चीनी अधिकारियों ने कुछ अन्य मस्जिदों में गुंबद और मीनारों को भी ध्वस्त कर दिया।
 
इस्लामी प्रतीकों को हटाना केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है। सितंबर में, स्थानीय अधिकारियों ने एक रेस्तरां के मालिकों को चीनी में लिखे गए "अल्लाह अकबर" वाक्यांश को मिटाने का आदेश दिया।
 
पूरे चीन के चर्चों को भी इसी तरह के संघर्षों का सामना करना पड़ा है। इस साल मार्च में, चीन में एक ईसाई संगठन के निदेशक ने घोषणा की कि अधिकारियों के आदेश अनुसार सभी गैर-चीनी प्रतीकों और पहचानों को चर्चों से हटा देना चाहिए।
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