IQNA

16:21 - March 07, 2021
समाचार आईडी: 3475689
तेहरान (IQNA) मिस्र के अल-अजहर दारुल इफ्ता ने एक फतवा जारी किया जिसमें कहा गया था कि कोरोना वैक्सीन का इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा अमान्य नहीं होगा।

इकना ने एमिरती अखबार अल-बान के हवाले से बताया कि  अल-अजहर इलेक्ट्रॉनिक फतवा केंद्र ने अपने फेसबुक पेज पर कोरोना पर एक फतवा जारी किया जिसमें कहा गया है कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान कोरोना वायरस का इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा अमान्य नहीं होता है।।
फतवा में कहा गया है: कि कोरोना वैक्सीन एक मुसलमान को टीकाकरण के द्वारा दिया जाता है, मुँह से नहीं, और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों जैसे फाइजर, स्पुतनिक, मोद्रेना और अन्य द्वारा उत्पादित सभी कोरोना वैक्सीन को शरीर की प्रतिरक्षा को उत्तेजित करने के लिए इंजेक्शन लगाया जाता है।
इस फतवे के अनुसार, किसी भी संक्रमण से लड़ने के लिए मानव शरीर में जो टीके लगाए जाते हैं, वे न तो खाने के लिए होते हैं और न ही पीने के लिए, और उनका उपयोग सुइयों को इंजेक्ट करके किया जाता है, और यह टीका मुंह और नाक के माध्यम से नहीं लगाया जाता है, जो खुले होते हैं इस लिए रोज़ा बातिल नही होता है।
फतवा में आया है कि: रमजान के दौरान इस कोरोन वैक्सीन को बाज़ु में सुई लगाने से इफ्तार नहीं होता है। इसलिए, रमजान के दौरान दिन में इस कोरोन वैक्सीन को हाथ में लग़या जा सकता है; क्योंकि यह त्वचा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, हालांकि इफ्तार के बाद तक टीका को स्थगित करना बेहतर होता है; क्योंकि एक व्यक्ति को टीकाकरण के बाद पोषण या उपचार की आवश्यकता हो सकती है, और सर्वशक्तिमान ईश्वर हर चीज के बारे में अधिक जागरूक है।
मिस्र के दारुल इफ्ता ने यह भी पुष्टि की कि कोरोना वैक्सीन, इंट्रामस्क्युलर रूप से दिए गए किसी भी वैक्सीन की तरह, रमजान के पवित्र महीने के दौरान उपवास करने वाले व्यक्ति के उपवास को अमान्य नहीं करता है।
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