IQNA

आशूरा और आज हम/5
तेहरान(IQNA) रोना या आंसू बहाना शोक के मुख्य तत्व हैं और दूसरी ओर यदि ये आंसू पवित्र वस्तु के लिए बहते हैं, तो यह अल्लाह तक यात्रा के मार्ग को तेजी से तैय करते हैं, और इमाम हुसैन (अ0) के शोक से अधिक महत्वपूर्ण और क्या है?

एकना के अनुसार, तेहरान विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर और नेतृत्व विशेषज्ञों की सभा के सदस्य, मोहसिन इस्माइली ने कुरानिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ एकेडमिक्स के मोबिन स्टूडियो में आयोजित "आशूरा एंड अवर टुडे" पर व्याख्यान की एक श्रृंखला में आशूरा का विश्लेषणात्मक इतिहास की समीक्षा किया, इसकी जड़ें और आज के सबक, जिसका पांचवां भाग इस प्रकार है:
हुसैनी मज्लीसों में भाग लेने वालों के लिए, हमारे कथनों में तीन अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल किया गया है; कभी बोका, कभी अबका और तीसरी बार तबाकी शब्द का प्रयोग किया जाता है। अगर कोई हुसैन (अ0) के लिए रोता है या दूसरे को रोलाता है, तो यह उसके लिए इस दुनिया और फिर आख़िरत में कई सवाब हैं।
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