IQNA

14:12 - December 07, 2021
समाचार आईडी: 3476780
तेहरान(IQNA)अध्ययन में यह भी कहा गया है कि तुर्की संबंधों को मजबूत करने में पहल करने वाला था, लेकिन नख़रे उठाने वाली एकमात्र पार्टी इजरायल थी। अध्ययन में कहा गया है कि "अंकारा के साथ संबंध बहाल करने के लिए, तेल अवीव ने मांग की है कि अंकारा तुर्की की धरती से हमास के गुर्गों को निष्कासित करे और आंदोलन से संपर्क काट दे।
तुर्की के अधिकारियों की मुखर टिप्पणियों के बावजूद, जिन्होंने हमेशा ज़ायोनी शासन के खिलाफ बात की है और फिलिस्तीनियों का समर्थन किया है, तेल अवीव स्थित इज़राइल आंतरिक सुरक्षा अनुसंधान केंद्र द्वारा तुर्की के साथ अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार करने के लिए एक नई जांच के परिणाम पर पर्दा डाला गया है जो सिक्के के दूसरे पहलू को प्रतिबिंबित करते हैं।
इज़राइली केंद्र द्वारा हाल के एक अध्ययन के कुछ पहलू यहां दिए गए हैं, जिसमें 2010 में तुर्की जहाज "मरमरा" के डूबने के बाद तुर्की-इजरायल संबंधों में महत्वपूर्ण गिरावट का उल्लेख किया गया था जिसमें 10 तुर्की श्रमिकों को इजरायली सैनिकों द्वारा मार दिया गया था।
 
अध्ययन में कहा गया है, इजरायल-तुर्की राजनीतिक संबंधों में गिरावट के बावजूद, हाल के वर्षों में उनके द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दो-तिहाई द्विपक्षीय व्यापार तुर्की से इज़राइल तक था, और 2019 में, आधा मिलियन इज़राइली पर्यटकों ने तुर्की का दौरा किया, जो कि 2010 के मरमरा जहाज़ की तबाही से पहले दर्ज की गई संख्या के समान है।
 
अध्ययन में आगे कहा गया है कि "तुर्की में आर्थिक संकट के दौरान, तुर्कों के लिए इज़राइल के साथ संबंधों का महत्व और आवश्यकता बढ़ गई है, और इज़राइलियों का मानना ​​है कि अंकारा और तेल अवीव के बीच व्यापार संबंध द्विपक्षीय राजनीतिक संबंधों के प्रसार में ऐक महत्व कारक है जो रिश्तों के टूटने में योगदान दे सकता है।
 
तुर्की ने 2018 में तेल अवीव में अपने राजदूत को वापस बुलाया जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेल अवीव से अपने दूतावास को अधिकृत यरुशलम में ले गया और गाजा और कब्जे वाले बलों के बीच संघर्ष शुरू हो गया था तो तुर्की ने विरोध में तेल अवीव में अपने राजदूत को वापस बुला लिया लेकिन 2020 के अंत में राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने घोषणा की है कि वह इज़राइल के साथ संबंधों को सुधारने में रुचि रखते हैं, लेकिन यह भी कहा कि फिलीस्तीनी मुद्दा तुर्की की रेड लाइन है।
 
इजरायल के शोध के अनुसार, यह उल्लेखनीय है कि अंकारा और तेल अवीव के बीच राजदूतों के आदान-प्रदान के साथ ही, मई में गाजा पर इजरायल के हवाई हमले शुरू हुए और एर्दोगन ने इजरायल को शत्रुतापूर्ण संदेशों की एक श्रृंखला भेजी। लेकिन अध्ययन के अनुसार, एर्दोगन और ज़ायोनी राज्य के राष्ट्रपति के बीच पहली टेलीफोन बातचीत कुछ सप्ताह बाद जून 2021 में हुई थी। और एक दशक में पहली बार तुर्की ने तेल अवीव में एक सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल भेजा, लेकिन तेल अवीव ने सावधानी से जवाब दिया। यह स्पष्ट नहीं था कि तुर्की संबंधों में एक नया पृष्ठ खोलने के लिए कितना उत्सुक है  और क्या यह कदम केवल इज़राइल, ग्रीस और साइप्रस के बीच मजबूत संबंधों को कमजोर करने का प्रयास था।
 
लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि तुर्की के अधिकारियों ने इजरायल की स्थिति पर औपचारिक रूप से अपनी स्थिति नहीं बताई है, लेकिन कुछ ने संकेत दिया है कि राजदूतों के आदान-प्रदान के साथ, हमास के एक वरिष्ठ नेता सालेह अल-अरोरी ने 2012 में तुर्की छोड़ दिया और तुरंत सीरिया लौट आए।
 
तेल अवीव और अंकारा के बीच संबंधों की प्रकृति से परिचित विश्लेषक इस अध्ययन के निष्कर्षों से आश्चर्यचकित नहीं हैं, खासकर जब से द्विपक्षीय संबंध 1948 में शुरू हुए और तुर्की सूदखोर सरकार को मान्यता देने वाला पहला इस्लामी देश था। इस संबंध की शाखाएं समय के साथ बढ़ी हैं, और यद्यपि तुर्की के अधिकारियों ने अपने बयानों में इजरायल विरोधी बयानबाजी का इस्तेमाल विशुद्ध रूप से प्रचार उद्देश्यों के लिए किया है, इससे सैन्य, आर्थिक या सुरक्षा संबंधों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है। यह ठीक वही शोध है जिस पर इजरायली शोध जोर देरहा है।
अहलुल बैत (अ.स) समाचार एजेंसी।

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