तेहरान (IQNA) प्रोफेसर अब्दुल फत्ताह तरुती, मिस्र के कुरान के उस्ताद और केराअत करने वालों में से एक, सालिम मोहम्मद अल-लैसी जो मिस्र के दिवंगत कारीयों में से एक है इन के बारे में बात की है, जिनको उनकी मृत्यु के पांच साल बाद भी अपने तरीके से श्रव्य पाया ग़या।

एकना के अनुसार, प्रोफेसर तारुती ने फिल्म में कहा: कि "शेख मोहम्मद अल-लैसी की मृत्यु उनके पिता की तुलना में पांच साल पहले हुई थी। जब अल-लैसी के पिता की मृत्यु हो गई, तो उनके साथ उनके पिता को दफनाने के लिए मकबरा संबंधित काम करने वालों ने उनकी कब्र खोली तो उस्ताद अल-लैसी के एक दोस्त ने आवाज़ दिया और कहा, कि यहाँ आओ, देखो तुम्हारा दोस्त कैसा है, उसकी उंगलियां फैली हुई थीं और सीधी थीं, उन्होंने शेख को इस तरह से दफन नहीं किया था, उन्होंने शेख का हाथ छु कर देखा और देखा कि वह सुरक्षित है, यहाँ तक कि उसके एक मित्र ने उसके शरीर को छुआ तो देख़ा कि बिलकुल स्वस्थ है।
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