
सूरह दुख़ान के छंद 10 से 12 तक इस मिस्र के क़ारी का पाठ «فَارْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِي السَّمَاءُ بِدُخَانٍ مُبِينٍ، يَغْشَى النَّاسَ هَذَا عَذَابٌ أَلِيمٌ، رَبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ: तो उस दिन की प्रतीक्षा करो जब आकाश प्रत्यक्ष धुंआ लाएगा, जो लोगों को अपनी चपेट में ले लेगा यह एक दर्दनाक सजा है, {वे कहते हैं} हे भगवान, इस सजा को हमसे हटा दे क्योंकि हमें विश्वास है" आप निम्नलिखित में सुनेंगे:
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