इकना के अनुसार, मनामा पोस्ट की रिपोर्ट है कि बहरीन के गृह मंत्रालय से जुड़े अर्धसैनिक बलों ने अल-दराज़ शहर की घेराबंदी करके सख्त सुरक्षा प्रतिबंध लगा दिए, जिससे लगातार सैंतालीसवें सप्ताह तक शियाओं की जुमे की नमाज़ नहीं हो सकी।
बीते शुक्रवार, 7 शहरीवर (29 अगस्त के आसपास) को, पूरी तरह से सशस्त्र सैन्य बल और बहरीन के सैन्य व बख़्तरबंद वाहन इमाम सादिक मस्जिद के आसपास तैनात हो गए, ताकि सुरक्षा और धार्मिक नाकेबंदी के विरोध में, गाजा के साथ एकजुटता दिखाने और सियोनिस्ट शासन के साथ सामान्यीकरण (सामंजस्य) को अस्वीकार करने के लिए होने वाले जनप्रदर्शनों को शुरू होने से पहले ही दबा सकें।
इसी बीच, कई क्षेत्रों में सियोनिस्ट घेराबंदी, गाजा पट्टी में जारी नरसंहार के अपराधों और भूख के युद्ध की निंदा करते हुए जनप्रदर्शन हुए।
प्रदर्शनकारियों ने फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन की योजनाओं को खारिज किया और बहरीन सरकार से आग्रह किया कि वह सियोनिस्ट शासन के साथ औपचारिक संबंधों के सामान्यीकरण को समाप्त करे, उसके राजदूत को निष्कासित करे और मनामा में उसके दूतावास को बंद करे।
उन्होंने लेबनान, गाजा और यमन में इस्लामिक प्रतिरोध अक्ष के समर्थन और हिज़बुल्लाह लेबनान के शहीद महासचिव सय्यद हसन नसरुल्लाह के प्रति अपनी निष्ठा की फिर से पुष्टि की।
बहरीन के लोगों ने जोर देकर कहा कि वे बहरीन में नए सियोनिस्ट राजदूत का स्वागत करने और उन्हें राजदूत के रूप में मान्यता देने के शासन के फैसले को स्वीकार या मान्यता नहीं देते हैं। उन्होंने जनता के रुख की फिर से घोषणा की कि वे इस शासन के साथ हर रूप में सामान्यीकरण और बहरीन की भूमि पर कब्ज़ा करने वालों का अपमान अस्वीकार करते हैं।
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