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तीसरे अंतरराष्ट्रीय 'मीरास-ए-अरबईन-ए-हुसैनी' महोत्सव का आयोजन

23:19 - July 31, 2026
समाचार आईडी: 3485641
तेहरान (IQNA) इल्म व फ़रहंग (विज्ञान एवं संस्कृति) विश्वविद्यालय द्वारा तीसरे अंतरराष्ट्रीय 'मीरास-ए-अरबईन-ए-हुसैनी' महोत्सव का आयोजन किया गया। यह महोत्सव अरबईन की ज्ञान, कला और सभ्यतागत विरासत को समर्पित था।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, इस महोत्सव का मुख्य विषय था "अरबईन की विरासत: इस्लामी विश्व की सभ्यतागत पहचान को सुदृढ़ करने का आधार"।

इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के पर्यटन संकाय, तेहरान नगर निगम के पर्यटन विभाग, फ़ाख़रबूम एक्सेलेरेटर, तथा ईरानी इस्लामी क्रांति और पवित्र रक्षा के राष्ट्रीय संग्रहालय सहित कई वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग से किया गया।

इस महोत्सव में शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, नगर प्रशासन के अधिकारियों, कलाकारों, ज़ियारत पर्यटन विशेषज्ञों, मवाकिब (ज़ायरीन की सेवा करने वाले शिविरों) के प्रबंधकों तथा अरबईन अध्ययन में रुचि रखने वाले अनेक लोगों ने भाग लिया।

विश्वविद्यालय के पर्यटन संकाय के अध्यक्ष सैय्यद सईद हाशमी ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में अरबईन को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक, सामाजिक और सभ्यतागत विरासत के रूप में बहुआयामी दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।

इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों और विद्वानों की उपस्थिति में कई विचार-विमर्श सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सामूहिक सामाजिक स्मृति, शहरी जीवन, जातीय विविधता, शहरी कूटनीति, धार्मिक कला, ज़ियारत पर्यटन, अरबईन से जुड़ी नीतियाँ तथा आधुनिक इस्लामी सभ्यता के निर्माण में अरबईन की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

विश्वविद्यालय के फ़ाख़रबूम एक्सेलेरेटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और महोत्सव के वैज्ञानिक सचिव ने बताया कि इस महोत्सव की एक विशेष उपलब्धि मुहर्रम भ्रमण (मुहर्रम टूर) और राजधानी के विभिन्न इलाकों की धार्मिक परंपराओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करने वाले पूर्व-कार्यक्रम थे, जिनका अरबईन के महान आयोजन से गहरा संबंध था।

उन्होंने आगे कहा कि महोत्सव के दिन "सचेत धार्मिक सामाजिक सहभागिता" विषय पर एक विशेष कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसका केंद्र अरबईन के मवाकिब और कारवाँ के प्रबंधन पर था। इस कार्यशाला का उद्देश्य इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के व्यावसायिक ज्ञान को बढ़ाना, व्यावहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा सांस्कृतिक प्रबंधन के नए मॉडल प्रस्तुत करना था।

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