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इस्तांबुल रेस्टोरेंट में नअनीअ की अलग अलग तिलावत

16:24 - August 27, 2016
समाचार आईडी: 3470703
इस्तांबुल रेस्टोरेंट में नअनीअ की अलग अलग तिलावत
अंतरराष्ट्रीय टीम: अहमद नअनीअ, मिस्र के प्रसिद्ध क़ारी इस्तांबुल, तुर्की के शहर इस्तांबुल के एक रेस्तरां में मुसलमानों की ईमानदार संख्या की उपस्थित में कुरान की तिलावत की।
इस्तांबुल रेस्टोरेंट में नअनीअ की अलग अलग तिलावत

अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA), वियना में इमाम अली (अ.स) के इस्लामी केंद्र के आधिकारिक चैनल ने वीडियो टेलीग्राम में अहमद अहमद नअनीअ, मिस्र के प्रसिद्ध क़ारी द्वारा तुर्की में एक रेस्तरां में मुसलमानों के साथ पढ़ी क़िराअत व मुलाक़ात को जारी किया।

नअनीअ ने इस मुलाक़ात में क़िराअत करते समय उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुऐ अलग अलग बैठकों में क़ारी के क़िराअत करने के तरीक़ों में प्रभावित करने वाले कारकों को समझाया और कहाःआवाज़ का धीमा होना,माइक का न होना,और लोगों का कम होना मेरे अंदर प्रभाव डालता है।

वह कहते हैं कि मिसाल के तौर पर,जब मैं ने ईरान की यात्रा की थी तो काशान शहर में ऐक क़ुरानी समारोह में जहां सामने 600 या700 लोग बैठे थे और बड़े बड़े माइकों पर तिलात की जो सबब हुआ कि मेरी आज़ तेज़ व ऊंची थी लेकिन आज यहां छोटे से मजमे में जैसा कि आप लोग देख रहे हैं काफ़ी धीमी आवाज़ में जो बैठक के अनुसार है क़ुरान पढ़ रहा हूं।

दर्शकों की भीड़ में नअनीअ की तिलावत का प्रशंसा के साथ स्वागत किया गया।

मिस्र के प्रसिद्ध क़ारी ने बैठक में सूरऐ मर्यम की 51 से 57 तक और सूरऐ काफ़ेरून को इस तरह से सुनाया:

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مُوسَى إِنَّهُ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَبِيًّا किताब में मूसा को या करो जो ख़ालिस थे और रसूल नबी थे.

وَنَادَيْنَاهُ مِنْ جَانِبِ الطُّورِ الْأَيْمَنِ وَقَرَّبْنَاهُ نَجِيًّا: और हमने तूर के दहने ओर से आवाज़ दी और अपने से निकट कर लिया.

وَوَهَبْنَا لَهُ مِنْ رَحْمَتِنَا أَخَاهُ هَارُونَ نَبِيًّا: और हमने अपनी रहमत से उनको हारून जैसा भाई दिया जो नबी था.

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِسْمَاعِيلَ إِنَّهُ كَانَ صَادِقَ الْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَبِيًّا: और याद करे किताब में इस्माइल नबी को जो वादे सच्चे और नबी रसूल थे.

وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُ بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَكَانَ عِنْدَ رَبِّهِ مَرْضِيًّا: और अपने घर वालों को नमाज़ पढ़ने व ज़कात निकालने का आदेश देते थे अपने रब के निकट पसंदीदा थे.

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَبِيًّا: और इस किताब में इद्रीस नबी को याद करे जो नबी व सच्चे थे.

وَرَفَعْنَاهُ مَكَانًا عَلِيًّا: و [ما] और हमने उनको बुलंद मुक़ाम अता किया.

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ: शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है.

قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ: कहोःऐ काफ़िरो

لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ: जिसकी तुम पूजा करते हो मैं उसकी पूजा नहीं करूंगा

وَلَا أَنْتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ: और जिसकी हम इबादत करते हैं तुम नहीं करोगे

وَلَا أَنَا عَابِدٌ مَا عَبَدْتُمْ: और न हम वह पूजेंगे जो तुम पूजते हो

وَلَا أَنْتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ: और जो हम इबादत करते हे तुम नहीं करोगे

لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ: तुम्हारे लिऐ तुम्हारा धर्म और हमारे लिऐ हमारा धर्म

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अहमद नअनीअ



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