IQNA

19:57 - September 17, 2017
समाचार आईडी: 3471820
अंतर्राष्ट्रीय समूह: बहुत से श्रीलंकाई तमिल और मुस्लिम अपने देश और म्यांमार की स्थिति को समान बताते हैं और यह देश भी मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों में वृद्धि का गवाह है।

श्रीलंका और रोहिंगया जैसे परिदृश्य

अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) ने «ईसाई पोस्ट»खबर के अनुसार बताया, बहुत से श्रीलंकाई तमिल और मुस्लिम, अपने देश और म्यांमार की स्थिति को समान बताते हैं दोनों देशों में बौद्ध धर्म प्रमुख है, और बौद्ध चरमपंथी भिक्षु, अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक और जातीय घृणा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

श्रीलंका दक्षिण एशिया में एक द्वीप है और अब मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों में वृद्धि देखी जा रही है।

हाल के दिनों में इस देश में, तमिल हिंदू मुसलमानों के साथ सड़कों पर आए और विरोध प्रदर्शन आयोजित करके म्यांमार के रोहिंग्या लोगों के साथ एकजुटता का ऐलान किया।

म्यांमार के पीड़ितों के समर्थन में लख्नऊ के धर्मों के अनुयायियों की फ़र्याद

रिपोर्ट में यह भी पता चलता है कि, हजारों रोहिंग्या मुस्लिम के के भागने के साथ जिसे संयुक्त राष्ट्र ने उत्तरी म्यांमार में "जातीय सफाई" का नाम दिया है " ईसाइऔर मुसलमान और भारत के सभी धर्मों के अनुयायी लखनऊ" में एकत्र हुए ता कि इन अपराधों के संबंध में अपने विरोध का ऐलान करें।

पर बैठक भारत के विभिन्न धर्मों के अनुयायियों ने इस सभा में जो शुक्रवार (15 सितंबर) को आयोजित की गई, म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने म्यांमार सरकार पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाने और मुसल्मानों को यातनाऐ देने वाले एजेंटों को आतंकवादी सूची में रखने की मांग की।

म्यांमार में रोहिंया मुस्लिम अल्पसंख्यक के खिलाफ हालिया हिंसा के परिणामस्वरूप बहुत से लोग मारे गए हैं और करीब 400,000 बांग्लादेश में भाग गए हैं।

शरण तलाशने वालों को म्यांमार के साथ सीमा पार करने और बांग्लादेश में प्रवेश करने के लिए एक हफ्ते से अधिक समय तक चलना पड़ता है।

ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, राख़ीन राज्य में लग भग 62 रोहिंगिया गांवों को बौद्ध चरमपंथियों और सेनाओं द्वारा जलाकर नष्ट कर दिया गया है।

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