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सैदा बैठक में जोर दिया;
17:36 - February 03, 2020
समाचार आईडी: 3474415
अंतर्राष्ट्रीय समूह- लेबनान और फिलिस्तीनी विद्वानों ने सैदा शहर में सेंचुरी डील योजना की निंदा में एक बैठक आयोजित करके जोर देकर कहा कि Quds और फिलिस्तीन की भूमि बिक्री के लिए बिल्कुल भी नहीं है।

अल अहद समाचार साइट के अनुसार IQNA की रिपोर्ट, शेख़ माहेर हम्मूद, प्रतिरोध विद्वानों के संघ के प्रमुख और शेख हसन अब्दुल्ला, मुफ्ती सूर और जबल आमुल सहित कई फिलिस्तीनी और लेबनानी विद्वानों ने रविवार 2 फरवरी को सैदा शहर में एक बैठक में ट्रम्प के अपमानजनक सेंचुरी डील की निंदा की।
इस बैठक में जोर दिया गया कि ट्रम्प और अन्य जो कि ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें मुजाहिदीन और प्रतिरोधी फिलिस्तीनी राष्ट्र के लिए निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद और ज़ायोनी शासन के खिलाफ संघर्ष की एक सदी के दौरान हजारों शहीदों की पेश किया है। जो कोई भी फिलिस्तीन का मालिक नहीं है,, चाहे ट्रम्प हों या कोई दूसरे, ज़ायोनी शासन को एक इंच भी फिलिस्तीनी भूमि देने का कोई अधिकार नहीं है।
फिलिस्तीनी और लेबनानी विद्वानों ने इसी तरह जोर दिया: दुनिया भर में 13 मिलयन से अधिक फिलिस्तीनी चाहे फिलिस्तीन, वेस्ट बैंक, गाजा, शिविरों और दुनिया के अन्य हिस्सों के अंदर और बाहर रह रहे हैं, सभी फिलिस्तीनी मिट्टी से एक ज़र्रह भी पीछे हटना को तय्यार नहीं हैं। इसका समाधान यह है कि ज़ायोनी दुश्मन को पूरे फिलिस्तीन से निष्कासित कर दिया जाए।
बैठक में मौजूद मुस्लिम विद्वानों ने सदी का सौदा नामक "शर्मनाक सौदेबाजी" के अपराध का सामना करने के लिए फिलिस्तीनी लोगों की सफ़ों में एकता का आह्वान किया और जोर दिया कि प्रतिरोध ही इस योजना को विफल करने और Quds और पूरे फिलिस्तीन को मुक्त करने का एकमात्र तरीका था।
इन विद्वानों ने गाजा पट्टी में फिलिस्तीनियों से तीसरे इंतिफादा का आह्वान किया और वापसी मार्च को जारी रखने तथा किसी भी अत्याचार का जवाब देने के लिए पूर्ण आमादगी और इस क्षेत्र में प्रतिरोध को पूरी तरह से तैयार रहने की मांग की उन्होंने इसी तरह इस सदी डील अपराध की निंदा करने के लिए दुनिया भर और शिविरों में फिलिस्तीनियों के प्रदर्शनों को जारी रखने की मांग की है।
 
इस बैठक में शुक्रवार के अरब और इस्लामी दुनिया के ख़तीबों से अपने शुक्रवार प्रार्थना उपदेश में सदी डील अपराध की निंदा करने और अपनी कक्षाओं, बैठकों और व्याख्यान में फिलिस्तीन, कुद्स शरीफ, अल-अक्सा मस्जिद और पवित्र कुरान में उनके स्थान पर स्पीच देने के लिए कहा।
लेबनानी और फिलिस्तीनी विद्वानों ने इसी तरह "क़ुद्स, पूरे फ़िलिस्तीनी क्षेत्र की राजधानी", "नो डील ऑफ़ द सेंचुरी" और "नो फ़िलिस्तीनी सेल" नामक एक व्यापक सम्मेलन का भी आह्वान किया, साथ ही इजरायल के साथ संबंधों को बनाने को हराम करने और Quds और फिलिस्तीन की रक्षा के लिऐ जिहाद और प्रतिरोध को प्रोत्साहित करने के लिए फ़तवा जारी करने की मांग की।
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