IQNA

17:16 - March 29, 2020
समाचार आईडी: 3474599
तेहरान (IQNA)इराक़ के सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण, अयातुल्ला सैय्यद अली सीस्तानी ने शनिवार को कोरोना मृतकों के ग़ुस्ल व कफ़न के बारे में उनके कार्यालय को भेजे गए सवालों के जवाब दिए।
सोमरिया न्युज़ के अनुसार, इन जवाबों में कोरोना से प्रभावित मृतकों के ग़ुस्ल व कफ़न के बारे में सवालों की ओर इशारा किया गया है।
 
इन जवाबों में इस बात पर जोर दिया गया हैं कि ग़ुस्ल, हुनूत, कफ़न और संबंधित मामलों में सावधानी बरती जानी चाहिए।
 
फ़तवे में कहा गया है: यदि ग़ुस्ल करना संभव नहीं है, तो तयम्मुम पर छोड़ दिया जाएगा और यदि तयम्मुम भी मुम्किन नहीं है या देश के अधिकारी इसे रोकते हैं, तो शरीर को ग़ुस्ल व तयम्मुम के बिना ही दफ़नाया जाएगा।
 
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी हालत में, हुनूत की जरूरत नहीं है और इसका कोई विकल्प नहीं है।
 
अयातुल्ला सिस्तानी के सवालों और जवाबों का पूरा पाठ इस प्रकार है:
بسم الله الرحمن الرحیم
सलामुन अलैकुम और रहमतुल्लाह व बराकातुहू
 
प्रश्न: क्या उस मुसल्मान का ग़ुस्ल जो इस बीमारी के कारण मर गया है, दूसरे मरने वालों की तरह अनिवार्य है, या तयम्मुम काफ़ी है? और अगर अधिकारी तयम्मुम की अनुमति नहीं देते हैं इस तरह कि मय्यत को रासायनिक परिरक्षकों के साथ विशेष थैलों में रखा गया है और उन्हें दफनाने से पहले खोलना मना है, तो क्या किया जाना चाहिए?
 
उत्तर: यदि बीमारी फैलने के डर से ग़ुस्ल करने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन दस्ताने के उपयोग के साथ तयम्मुम संभव हो तो तयम्मुम दिया जाऐगा। लेकिन यदि तयम्मुम भी मुम्किन नहीं या संबंद्धित अधिकारी इस से रोकते हैं तो शरीर को ग़ुस्ल व तयम्मुम के बिना ही दफ़नाया जाएगा।
 
प्रश्न: अगर मय्यत का हुनूत व सात सजदे के स्थानों पर काफ़ूर को रगड़ना संभव नहीं है, तो क्या इसका कोई विकल्प है?
 
ए: ऐसी स्थिति में, हुनूत को समाप्त कर दिया जाएगा और कोई विकल्प नहीं है।
 
प्रश्न: क्या मय्यत के लिए तीन तक्फ़ीन जरूरी है? और अगर अधिकारी उस बैग को खोलने की अनुमति नहीं देते हैं, जिसके साथ वे कवर है तो क्या करना चाहिऐ?
 
उत्तर: मय्यत को तीन कपड़ों के साथ यहां तक कि कवर ऊपर अनिवार्य हैं, और यदि मय्यत को उन सभी के साथ कफ़न संभव नहीं है, तो जो कुछ भी संभव है, तो एक लंबी चादर जो पूरे शरीर को कवर करती हो, के साथ कफ़न किया जाना चाहिए।
 
प्रश्न: कुछ गैर-इस्लामिक देशों में, कोरोना मृतकों की लाशों का अंतिम संस्कार जला कर किया जाता है, क्या मुस्लिम लाशों को जलाने की अनुमति देना उचित है या उसके परिवार को इस काम से रोकना चाहिऐ ?
 
उत्तर: मुस्लिम शव को जलाने की अनुमति नहीं है और उसके रिश्तेदारों और अन्य लोगों को इस काम से रोकना चाहिए और दफ़न को दीने हनीफ़ में जिस तरह वाजिब है उसके आधार पर जोर दें।
 
प्रश्न: ताबूत में मय्यत रखने और ताबूत को मिट्टी में दफनाने का क्या हुक्म है?
 
उत्तर: यह जाऐज़ है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिऐ कि मय्यत को क़ब्र में जैसे रखते हैं ताबूत में दाहिनी करवट इस तरह रखें कि चेहरा क़िब्ले की ओर होना चाहिए।
 
प्रश्न: विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनर की मृत्यु को देश के एक परम्परागत कब्रिस्तान में दफ़न किया जा सकता है, और कब्र की गहराई पर विशिष्ट कार्य करने की आवश्यकता नहीं है, अन्यथा क्योंकि वायरस का जीवित रहना जीवित कोशिकाओं पर निर्भर है और संक्रमित की मृत्यु के बाद, वायरस घंटों तक जीवित रहता है, लेकिन मय्यत के शरीर से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है और परिणामस्वरूप नष्ट हो जाता है, इसलिए सावधानी बरतते हुए दस्ताने और मास्क और इन जैसी चीज़ें पहनना संक्रमित व्यक्ति के शरीर को स्थानांतरित करते और इसे दफनाते समय पर्याप्त है और दफनाने के बाद वायरस के दूसरों तक स्थानांतरित करने का कोई खतरा नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में, सार्वजनिक कब्रिस्तानों में कोरोना मृतकों को रोकने के लिए - भले ही वह जगह बाकी कब्रिस्तानों से अलग हो - उसके रिश्तेदारों की इच्छा और वसीयत के विपरीत, क्या हुक्म है?
 
उत्तर: इस सवाल के आधार पर सार्वजनिक कब्रिस्तानों में दफ़नाने से रोकने की अनुमति नहीं है, और अधिकारियों को इसे सुविधाजनक बनाना चाहिए।
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