पवित्र कुरान में कई वैज्ञानिक विषयों का उल्लेख है, जिन्हें कुरान के वैज्ञानिक चमत्कार कहा जाता है; क्योंकि ये मुद्दे सदियों बाद वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा साबित किए गए हैं। इसलिए, ये मुद्दे कुरान द्वारा ऐसे समय में उठाए गए थे जब किसी तरह की कोई स्टेडी तहक़ीक़ात नहीं हुईं थीं।

पवित्र कुरान में कई वैज्ञानिक विषयों का उल्लेख है, जिन्हें कुरान के वैज्ञानिक चमत्कार कहा जाता है; क्योंकि ये मुद्दे सदियों बाद वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा साबित किए गए हैं। इसलिए, ये मुद्दे कुरान द्वारा ऐसे समय में उठाए गए थे जब किसी तरह की कोई स्टेडी तहक़ीक़ात नहीं हुईं थीं।
इक़ना के अनुसार, एजाज अल-क़ुरान व अल-सुन्नह समाचार साइट ने, "सूरह तारिक़ पर वैज्ञानिक ग़ोर" शीर्षक वाले एक नोट में, इस सूरा के एक से तीन आयतों के वैज्ञानिक जायज़ा पर चर्चा की और कुदरती विज्ञानों के साथ इन आयतों के चमत्कारों को साबित किया।
इस सूरे में आया है «وَالسَّمَاءِ وَالطَّارِقِ؛ وَمَا أَدْرَاكَ مَا الطَّارِقُ: आकाश और
तारिक़ (रात के तारे) की क़सम; और आप क्या जानें कि तारिक़ क्या है" (तारिक़/1 और 2)
तारिक़ एक आसमानी जिस्म है जिसकी दो विशेषताएं हैं; एक तारा है और दूसरा नाफ़ीज़ है। यदि हम इन विशेषताओं की तुलना किसी आसमानी जिस्म से करें तो हम पाएंगे कि न्यूट्रॉन तारे में ये विशेषताएँ हैं। क्योंकि यह एक तारा है, और यह नाफ़िज़ भी है, और इसकी नब्ज़ और नियमित धड़कन भी है।
अल-तारक़ में नियमित और एक के बाद एक धड़कन होती हैं; ठीक वैसे ही जैसे न्यूट्रॉन तारे से परावर्तित तरंगें। एक न्यूट्रॉन तारे में माद्दे का ज्यादा से ज्यादा घना पन (कसाफ़त) होता है और यह इतना भारी होता है कि अगर यह पृथ्वी पर उतरा तो यह पृथ्वी में छेद कर देगा।
यह तारा अपनी जगह जबरदस्त रूप से घूमना शुरू कर देता है, प्रति सेकंड सैकड़ों चक्कर लगाता है, और इसके घूमने की गति और इसकी इनर्जी की गति के कारण, इसमें तेजी से पल्स होते हैं जो इसके चारों ओर एक बहुत मजबूत बिजली के चुम्बकीय क्षेत्र बनाते हैं। यह क्षेत्र हथौड़े जैसी आवाज भी पैदा करता है, इसलिए वैज्ञानिकों ने पाया है कि इन तारों का सबसे अच्छा नाम जायंट हैमर है। इस तरह कि अपनी तहक़ीक़ात में उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं, लेकिन कुछ वैज्ञानिक आश्चर्य करते हैं कि यह असली आवाज़ कैसे हो सकती है, जबकि आवाज़ ख़ला (स्पेस) में फैलती ही नहीं है।
वैज्ञानिकों ने इन आवाजों को रिकॉर्ड करके अपने वैज्ञानिक साइटों से प्रस्तुत किया है। ये आलात द्वारा रिकॉर्ड की गई असली आवाज़ें हैं, हालाँकि आवाज़ ख़ला (स्पेस) में नहीं फैलती है, लेकिन तारों की रेडियाई ताबकारी का तजज़िया करने के बाद आलात उनकी आवाज रिकॉर्ड कर सकते हैं।
ऐसे रेडियो टेलीस्कोप हैं जिन्होंने इन तारों से उच्च बारीकी के साथ रेडियो फ्लैश प्राप्त किया है। सिग्नल लगातार आते हैं: (बीप..बीप..बीप) और प्रत्येक सिग्नल एक सेकंड से भी कम समय तक रहता है और यह हर बार दोबारा आता है। जवानी में ये तरंगें बढ़ती हैं और बुढ़ापे में घटती हैं। तो ऐसे सितारे हैं जो चोट मारते हैं और चमकते हैं और ये ऐसे सितारों के लिए विशेष विशेषताएं हैं।
यह अल्लाह की दया के कारण है कि इन तारों की आवाज़ ख़ला (स्पेस) में नहीं फैलती है और इसीलिए हमें इन तारों की ध्वनि सुनाई नहीं देती है क्योंकि अगर उनकी आवाज़ ज़मीन तक पहुँची; तो हमारे कान तुरंत बहरे हो जायेंगे !! इस के बावजूद, रेडियो तरंगों का तजज़िया करने और इन तारों के कार्य मेकेनिज़्म की जांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि वे इन आवाजों को पैदा करते हैं।