IQNA

16:31 - November 30, 2014
समाचार आईडी: 2613492
अंतर्राष्ट्रीय समूह: अली जूमा, अल-अजहर विद्वानों के सदस्य और पूर्व मिस्री मुफ्ती,ने इस बात पर बल देते हुऐ कि शियों को काफ़िर कहना वैध नहीं है कहाः इस्लामी ख़िलाफ़त को बहाल करने का निमंत्रण बातिल है और सच्चे धर्म से कोई संबंध नहीं रखता है.

अंतर्राष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) वेबसाइट "Almslh" के हवाले से, अली जुमा,ने "अल-राय" कुवैत अखबार के साथ एक साक्षात्कार में कहाः सांप्रदायिकता एक उपकरण है जिसे राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जारहा है और खून बहाने का कारण है, लेकिन हम उस से लड़ाई करेंगे.
इस्लामी ख़िलाफ़त को बहाल करने का निमंत्रण बातिल है और सच्चे धर्म से कोई संबंध नहीं रखता है.
मिस्र के पूर्व मुफ्ती ने इस साक्षात्कार में कहा:तक्फ़ीरी सोच रखने वाले लोग डाइश और अलक़ाएदा आदि, इस्लाम और सच्ची शरीयत, कानून को नहीं जानते हैं और अपने कट्टरपंथी सोच से खून बहाते, और इस्लाम के दुश्मनों की दृष्टि इस्लाम में लागू कर रहे है और सच में वह लोग आगजनी और धार्मिक फ़साद को फैलाना चाहते हैं.
अली जुमा ने आगे कहाःयह सारे समूह ख़्वारिज हैं जिन्हों ने इस्लाम की छवि को दुनिया के सामने क्षतिग्रस्त कर दिया है और हत्यारे व भ्रष्ट, अपराधी, पापी हैं।.
उन्हों ने बल दियाःदाइश ऐक शैतानी पेड़ है जो ग़फ़लत के माहौल में बड़ा हुआ है ता कि कुछ अरबी देशों जैसे इराक,सीरिया और यमन की अराजक व नामुनासिब स्थिति से फ़ाएदा उठाऐं और झूट झूट इस्लामी ख़िलाफ़त को बहाल करने का निमंत्रण देते है ऐसी दावत जो बातिल और सच्चे धर्म से कोई संबंध नहीं रखती है.
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