तवासुल के मुताबिक, मुस्तफा मदबौली की अध्यक्षता वाली मिस्र की प्रधानमंत्री काउंसिल ने अल-अजहर यूनिवर्सिटी में एक नई फैकल्टी बनाने को मंज़ूरी दी, जिसका नाम फैकल्टी ऑफ़ कुरानिक साइंसेज एंड रिसाइटेशन्स होगा।
काउंसिल ने बताया कि यह फैसला “अल-अजहर और उससे जुड़े संस्थानों और उसके एग्जीक्यूटिव नियमों के रीऑर्गेनाइजेशन पर 1961 के संविधान और कानून नंबर 103 और उसके एग्जीक्यूटिव नियमों की समीक्षा करने के बाद, और अल-अजहर सुप्रीम काउंसिल की मंज़ूरी और अल-अजहर के शेख की सिफारिश के बाद” लिया गया था।
ऑफिशियल गजट में छपे इस फैसले में कॉलेज की दो ब्रांच बनाना शामिल है, एक लड़कों के लिए और एक लड़कियों के लिए। लड़कों की ब्रांच काहिरा के इस्लामिक दावत कॉलेज में होगी, और लड़कियों की ब्रांच काहिरा के गर्ल्स इस्लामिक एंड अरेबिक स्टडीज़ कॉलेज में होगी।
दोनों ब्रांच 2026/2027 एकेडमिक ईयर में पढ़ाना शुरू कर देंगी।
यह फ़ैसला रमज़ान के पवित्र महीने के बीच आया है, जब मिस्र के लोग पवित्र कुरान पढ़ने के लिए उत्सुक रहते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अल-अज़हर यूनिवर्सिटी अपने कॉलेजों में कुरान और कुरानिक साइंस पढ़ाने के लिए मशहूर है, और मिस्र अपने मशहूर कुरान पढ़ने वालों के लिए “पढ़ाई की ज़मीन” के तौर पर जाना जाता है।
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