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रहबरे इंक़ेलाब आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई का हज का पैग़ाम

11:29 - May 26, 2026
समाचार आईडी: 3485369
इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता की ओर से इस साल 1447 हिजरी क़मरी का हज का पैग़ाम, जारी हुआ जिसे मुशरिकों से बेज़ारी के प्रोग्राम में, हज व ज़ियारत के मामलों में इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने पढ़कर सुनाया।

हज का पैग़ाम इस प्रकार हैः

बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम

लब्बैक, अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैक लाशरीका लका लब्बैक, इन्नल हमदा वन्नेमता लका वल मुल्क…

ऐ अल्लाह! तेरी दावत पर लब्बैक कहता हूं; तेरा कोई शरीक नहीं है और सारी तारीफ़ें, सारी नेमतें, पूरी सृष्टि और ताक़त तेरी तरफ़ से है और तू ही इन का स्रोत है...इस साल भी हज का मौसम आ गया और इस्लामी जगत के हाजियों ने, तेरी बंदगी का एहराम बांधा और तेरे हुक्म पर लब्बैक कहा ताकि भौतिक और सामान्य ज़िंदगी से पाकीज़ा और सौभाग्यशाली ज़िंदगी की ओर हिजरत करें; अल्लाह की बंदगी के ध्रुव पर और अल्लाह के शरीकों को नकारने और उन से दूरी पर आधारित ज़िंदगी की तरफ़। हिजरत का यह मौक़ा सिर्फ़ इस साल अल्लाह के घर का हज और दर्शन करने वालों से विशेष नहीं है, बल्कि ईरान और दुनिया के उन सभी मुसलमान भाइयों और बहनों के लिए है जो पिछले बरसों में हज कर सके और वो जो अभी तक हज नहीं कर पाए। इस हिजरत की शर्त, अल्लाह के ज़िक्र के ध्रुव पर स्थायी एहराम बांधना है; सत्य के ध्रुव पर स्थायी रूप से तवाफ़ करना है; अल्लाह की ओर से निर्धारित फ़रीज़े की भारी ज़िम्मेदारियों की चोटियों के दरमियान निरंतर सई करना है; दुष्ट शैतान को उसकी भ्रामक झलकियों और उस के अनुयाइयों के साथ, हमेशा कंकरियां मारना है, अल्लाह की ओर ध्यान और उस के सामने गिड़गिड़ाने की हालत में वुक़ूफ़ है; राह में रह जाने वाले निर्धन और मिस्कीन को खाना खिलाना है; गुमराह करने वाली इच्छाओं और रुझानों को क़ुर्बान करना और भीतरी बुराइयों को मिटाना है; और हर हालत में सेवा के लिए और सत्य की रक्षा के ध्वज को फहराने कि लिए तैयार रहना है। इस तरह ईरानी क़ौम ने इस्लामी इंक़ेलाब के मीक़ात में, इसी हिजरत की राह पर क़दम रखा, महान ख़ुमैनी की इब्राहीमी आवाज़ पर लब्बैक कहा और ग़ैरों के वर्चस्व को क़ुबूल करने का लेबास उतार फेंका, दुनिया और आख़ेरत के सौभाग्य का एहराम पहना, लब्बैक कहते हुए और हरवला करते हुए शुद्ध मोहम्मदी इस्लाम की शिक्षाओं के आधार पर तवाफ़ करने और ख़ुद को वैश्विक इंसाफ़ और विलायत के चमकते हुए प्रकाश के क़रीब करने की कोशिश की।

अल्लाहो अकबर, अल्लाहो अकबर, ला इलाहा इल्लल लाहो वल्लाहो अकबर, अल्लाहो अकबर व लिल्लाहिल हम्द, अल्लाहो अकबर अला मा हदाना

जी हाँ अल्लाहो अकबर...और इसी अल्लाहो अकबर के हथियार के सहारे ईरान की मुसलमान क़ौम ने 47 साल पहले आंदोलन किया और पहलवी की सरकश, तानाशाह और पिट्ठू हुकूमत का तख़्ता उलट दिया, लालची और साम्राज्यवादी अमरीका के हाथ को ईरान से काट दिया और ज़ायोनी सरकार के प्रभाव को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया। इसी अल्लाहो अकबर के हथियार के ज़रिए ईरान की सरज़मीन पर सद्दाम की बासी सरकार के हमले के बाद, अपनी जान की परवाह न करने वाले ग़ैरतमंद मुजाहिदों और जवानों ने, आठ साल के पाकीज़ा डिफ़ेंस की शौर्यगाथा लिखी और पूरब और पश्चिम की सभी ताक़तों की ओर से बासी शासन के हर तरह के सपोर्ट के बावजूद, उसे उसकी औक़ात बता दी और इस दृढ़ता को बाद के बरसों में आर्थिक पाबंदियों, विद्रोह, ज़ालेमाना पाबंदियों, इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ दुश्मनों के अनगिनत राजनैतिक, प्रचारिक और आर्थिक हमलों के मुक़ाबले में, पूरी ताक़त से जारी रखा।

अल्लाहो अकबर का यही नारा था जिस ने, ईरान से लेकर लेबनान, फ़िलिस्तीन, इराक़ और सीरिया तक, और अफ़्रीक़ा और यमन से लेकर अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान और दुनिया की तमाम आज़ाद क़ौमों तक, इस्लामी उम्मत और रेज़िस्टेंस के मोर्चे के मुजाहिद जवानों के बीच आपसी रिश्तों को मज़बूत बनाया ताकि अल्लाह की यह मज़बूत रस्सी क़ाबिज़ ज़ायोनियों के मुक़ाबले में इस्लामी उम्मत की रक्षा के लिए उठ खड़ी हो, दाइश को मिटा दे, अलअक़्सा फ़्लड आप्रेशन शुरू करे और डगमगाते ज़ायोनी शासन की सांसें रोक दे।

अल्लाहो अकबर; जी हाँ महान अल्लाह इस बात से कहीं बुलंद है कि उसे व्याख्या के दायरे में लाया जा सके... यह अल्लाहो अकबर का हथियार ही था कि इस्लामी गणराज्य ने जिस के सहारे, ज़ायोनी शासन को जून 2025 में थोपी गयी दूसरी जंग में अपने भीषण वार से बेबस बनाने, हमलावर अमरीका को ज़ोरदार तमांचा रसीद करने और दुश्मन को ईरान को झुकाने के उस के लक्ष्य में नाकाम बनाने में कामयाबी हासिल की। और अल्लाहो अकबर के हथियार ने ईरानी क़ौम को ऐसी ताक़त और शक्ति दी कि आज की दुनिया के सब से दुष्ट लोगों के हाथों पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही वसल्लम के फ़रज़न्द, महान नेता, हज़रत आयुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई की, अल्लाह उन के दर्जे बुलंद करे, हृदय विदारक शहादत के बाद, उसे इलाही बेसत हासिल हुयी और उस मैदान में जहाँ उस की मौजूदगी की ज़रूरत थी, इस क़ौम ने भरपूर तरीक़े से मौजूद होकर अपने गौरवपूर्ण कारनामों से दुनिया की आँखों को चकाचौंध कर दिया।

निःसंदेह महान अल्लाह इस बात से कहीं बुलंद है कि उसे व्याख्या के दायरे में लाया जा सके...इसी अल्लाहो अकबर के हथियार के ज़रिए इस्लामी मुल्क ईरान में ग़ैरतमंद मुजाहिदों और जान की क़ुरबानी देने वाली फ़ोर्सेज़ ने, रेज़िस्टेंस के मोर्चे ख़ास तौर पर अज़ीज़ लेबनान की रेज़िस्टेंस फ़ोर्स के साथ मिलकर, तीसरी थोपी गयी जंग में अमरीका और इस्राईल की सिर से पैर तक हथियारों से लैस आतंकवादी सेनाओं के मुक़ाबले में बड़ी सफलताएं हासिल कीं; अल्लाह पर भरोसा करते हुए और अपने मिज़ाईलों और ड्रोन विमानों से महाशैतान यानी अमरीका और उस के पालतू कुत्ते ज़ायोनी शासन को जल थल और हवा में ढेर कर दिया और अल्लाह की राह में जेहाद करने वालों की मदद के सच्चे वादे को अपनी आँखों से देखा।

एक बार फिर अल्लाहो अकबर; निःसंदेह महान अल्लाह इस बात से कहीं बुलंद है कि उसे व्याख्या के दायरे में लाया जा सके और उस के लश्कर हर ताक़त पर ग़ालिब हैं... और इसी अल्लाहो अकबर के हथियार से  ईरानी क़ौम और रेज़िस्टेंस मोर्चे की बेसत और उठ खड़े होने के बाद, मुस्मिल उम्मत की बेसत सामने आएगी और मुशरिकों से बेज़ारी हज के रमिए जमरात नामी संस्कार से लेकर पूरी दुनिया में हर जगह मुसलमानों की व्यक्तिगत, सामाजिक और राजनैतिक ज़िंदगी के तमाम पहलुओं तक फैल जाएगी।

मुस्लिम उम्मत और क्षेत्र की क़ौमों के बीच बहुत सारी संयुक्त क्षमताएं और हित हैं जो इलाक़े और दुनिया के भविष्य की नई व्यवस्था निर्धारित करेंगी। मैं पूरी सच्चाई और निष्ठा से सभी मुल्कों और इस्लामी सरकारों को भलाई और नेकी में सहयोग और दोस्ती की दावत देता हूं कि हम आपसी सहयोग से, इस्लामी उम्मत की प्रगति और इस्लामी दुनिया के मसलों के हल के लिए क़दम उठाएं। इस संदर्भ में जो बात स्पष्ट है वह यह कि समय की सूई पीछे नहीं पलटेगी और क़ौमें और क्षेत्र की सरज़मीनें, अब अमरीकी छावनियों की ढाल नहीं होंगी। अब अमरीका के पास इलाक़े में शैतानी हरकतों और फ़ौजी अड्डे बनाने का कोई सुरक्षित स्थान नहीं होगा, और साथ ही वह दिन ब दिन अपनी पिछली पोज़ीशन से दूर होता जाएगा। डावांडोल ज़ायोनी शासन और इस्राईल रूपी कैंसर भी अपनी मनहूस ज़िंदगी के अंतिम पड़ाव के निकट पहुंच चुका है और अल्लाह की कृपा और महान शहीद नेता की, अल्लाह उनके पाकीज़ा नफ़्स को मुक़द्दस क़रार दे, दस साल पहले की ठोस और आगे का अंदाज़ा लगाने वाली भविष्यवाणी के मुताबिक़, वह इस तारीख़ के बाद 25 साल नहीं देख पाएगा, इंशा अल्लाह।

इस नज़र से इस साल मुशरिकों से बेज़ारी के विषय की अहमियत दुगुनी हो गयी है और अमरीका तथा ज़ायोनी शासन से बेज़ारी की गहराई और उस का दायरा, हज के मौसम में बेज़ारी के संस्कार से आगे बढ़ चुका है और ईरान तथा दुनिया के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों तक और इन मुबारक दिनों के बाद भी अमरीका मुर्दाबाद और इस्राईल मुर्दाबाद, मुस्लिम उम्मत और दुनिया भर के मज़लूमों ख़ास तौर पर जवानों का प्रचलित नारा बन जाएगा।

भविष्य इस्लामी जगत और नई इस्लामी सभ्यता का है और हम में से हर एक अपनी हिम्मत, सलाहियत और ज़िम्मेदारी भर, इस भविष्य को व्यावहारिक बनाने और उस के निकट होने में अपना योगदान दे सकता है। इस साल के हज में ईरानी हाजियों और दर्शनार्थियों पर, दूसरे मुल्कों के अपने मुसलमान भाइयों और बहनों के लिए तीसरी थोपी गयी जंग की फ़तह को बयान करने और उन्हें उज्जवल भविष्य  के प्रति आशावान बनाने की अहम ज़िम्मेदारी है। मैं सभी सम्मानीय हाजियों से कहना चाहता हूं कि वे इंसानियत को नजात दिलाने वाले इमाम महदी -अल्लाह उन्हे जल्द ज़ाहिर करे- के जल्द प्रकट होने के लिए दुआ करें और इस्लामी जगत की एकता, फ़िलिस्तीन और मस्जिदुल अक़्सा की आज़ादी, मुसलमानों की बड़ी मुश्किलों के दूरे होने और विश्व साम्राज्यवाद के मुक़ाबले में निर्णायक सफलता तक पहुंचने के लिए दुआ करें और मुझे भी अपनी नेक दुआओं में शामिल करें।

ऐ अल्लाह! मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दुरूद भेज और हाजियों तथा पूरे इस्लामी जगत पर अपनी कृपा व मेहरबानी कर, उन के हज को क़ुबूल फ़रमा, उन के दिलों को आत्मज्ञान से रौशन कर दे और उन के इरादे को इस्लामी जगत की हालत बेहतर बनाने और इस्लाम के दुश्मनों पर निर्णायक कामयाबी के लिए क़दम उठाने के लिए ज़्यादा मज़बूत कर दे।

ऐ परवरदिगार! अपनी अथाह कृपा और रहमत को शहीदों ख़ास तौर पर रेज़िस्टेंस मोर्चे के शहीदों की पाकीज़ा आत्माओं जिन में सब से ऊपर अज़ीम रहबरे इंक़ेलाब हैं, नाज़िल फ़रमा और उन हाजियों के हज और इबादत करने वालों की इबादत और जद्दो जेहद करने वालों की सई  के सवाब में से, शहीद रहबर की पाकीज़ा आत्मा को एक बड़ा भाग प्रदान कर जो उम्मत के रबहर की हिदायत से लाभान्वित हुए, और उनकी राह को जारी रखने में ईरानी क़ौम तथा इस्लामी उम्मत की मदद कर।

ऐ अल्लाह!  हमारे सरपरस्त और मौला हज़रत इमाम महदी (जिनके ज़ाहिर होने का इंतेज़ार हो रहा है) और उन के पाकीज़ा पूर्वजों पर अपना श्रेष्ठतम दुरूद व सलाम नाज़िल कर और हम सब को तथा इस्लामी जगत को उन की पाकीज़ा और क़ुबूल शुदा दुआओं में शामिल कर, दुनिया को उन के मुबारक क़दम से जगमगा और रौशन कर दे उस तरह जैसा कि तूने वादा किया है और हमारा दिल इस निश्चित वादे की ओर से संतुष्ट है।

तुम में से जो लोग ईमान लाए और जिन्होंने नेक अमल किए, अल्लाह ने उन से वादा किया है कि वह उन्हें ज़मीन में उसी तरह जानशीन बनाएगा जिस तरह उन से पहले गुज़रे हुए लोगों को बनाया था और जिस दीन को अल्लाह ने पसंद किया है वह उन्हें ज़रूर उस पर क़ुदरत देगा और उन के ख़ौफ़ को अमन से बदल देगा।(सूरए नूर, आयत-55)

हमारे सभी मुसलमान भाइयों पर सलाम और अल्लाह की रहमत व बरकत हो।

सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई

9 ज़िलहिज्जा 1447 बराबर 26 मई 2026

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