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मिस्र के पूर्व मुफ्ती ने दाइश के ख़ुरूज पर इमाम अली (अ.स) के शब्दों का हवाला दिया

16:18 - September 20, 2014
समाचार आईडी: 1451877
अंतरराष्ट्रीय समूह: मिस्र के पूर्व मुफ्ती ने देश में शुक्रवार की नमाज के उपदेश में बोलते हुए इमाम अली(अ.स) के शब्दों का हवाला देते हुए आतंकवादी समूह दाइश के लक्षणों को वर्णित कियि.

अंतर्राष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) समाचार साइट दूरबीन के अनुसार, अली जुमा मिस्र के पूर्व मुफ्ती कल, 19 सितम्बर को शुक्रवार की नमाज के उपदेश में जो कि फ़ाज़िले शहर शशुम अक्टूबर मिस्र की मस्जिद में दिया गया था दाइशों के गुणों के बारे में इमाम अली के हवाले से कुछ प्वाइंट याद दिलाऐ.
उन्हों ने कहाः कि नईम बिन हम्माद ने अपनी अलफ़ितन नामी पुस्तक(fitna 1/210) में खलीफा अली इब्ने अबी तालिब के हवाले से कहा – जब  काले झंडे देखो तो अपनी जगह बैठे रहो इस लिऐ कि उनकी दावत बातिल है और उनकी मदद नहीं  करनी चाहिए फिर कमज़ोर लोग ज़ाहिर होंगे जिन के दिल लोहा की तरह सख़त हैं वह लोग किसी भी अहद के प्रति वफादार नहीं हैं,हक़ की ओर बुलाऐंगे स्वयम हक़ पर नहीं होंगे उनके नाम, उपनाम और निस्बतें शहरों के नाम से ली गई होंगी यहां तक कि खुद उनके बीच असहमति होगी और भगवान फिर अहले हक़ -जिसे भी चाहे –को ज़ाहिर करेगा.
उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुऐ कि इस कथन में इमाम अली (अ.स) ने दाइशयों के सिफ़ात गिनाऐ हैं पैगंबर (स.व.) के कथन निम्नानुसार इशारा और इमाम अली (अ.स) की वैधता व उनके शब्दों की शुद्धता पर बल दिया और कहा: हज़रत रसूल ने कहा, "मैं इल्म का शहर हूं और उसका दरवाज़ा",अली अ. ने इस समूह के सिफ़ात गहराई से बताऐ हैं उनके दिल सख़्त होंगे,यानि लोहे की तरह क़सीयुल क़ल्ब, "अपने को साहिबे दौलत यानि सरकार वाला कहेंगे" हम देख रहे हैं कि दाइश वाले अपने को इस्लामी राज्य से पहचनवाते हैं कि अब तक ऐक ख़्वारिज ने भी ऐसा नहीं किया और "उनके नाम कुन्नीयत,व निसबत शहरों से ली जाऐगी" दाइशों के नाम अबू बक्र,अबूयासीन, अल बगदादी अल Basri, अल Libi और अल मिस्री जैसे हैं. 
मिस्र के मुफ्ती ने कहाः कि दाइश समूहों की समस्या असली यह है कि इस्लाम को नहीं समझा बल्कि इस्लाम की बदली हुई छवि को देखा है क्यों कि दाइशी उलेमा व शेख़ों से प्रशिक्षित नहीं हैं बल्कि उनका धर्म अविश्वसनीय किताबों से गलत जानकारी से बना है दाइशों जमा कर लिया है इस लिऐ जो भी मालूमात रखते है इल्म नहीं है और हवा व हवस पर यह समूह बना है और दाऐं बाऐं धर्म के नाम पर लोगों की जान लेते हैं.
उन्होंने कहा कि पैगंबर (PBUH)ने हमारे लिऐ इस्लाम धर्म को छोड़ दिया कि जो कोई उससे विचलित होगा निश्चित रूप से हलाक होगाः इसधर्म की नींव दया व रहमत है पैगंबर मुहम्मद (PBUH) ने कहा: रहम करने वाले अल्लाह के रहम के रहम के हक़दार होंगे यह पहला सबक़ है जो छात्रों को दिया गया ता कि उनका ज्ञान और उनकी समझ धर्म से इस आधार पर स्थापित हो.
शेख अली जुमा ने आगे कहाः यह दाइशों का हाल है वे हमारे समय के Khawarij हैं अब ज़िक्र" حسبنا الله و نعم‌الوکیل केवल अल्लाह हमें suffices और क्या बेहतर समर्थन है" हर मोमिन का हथियार है इन अपराधियों और भ्रष्टों के खिलाफ, हालांकि संक्षिप्त लेकि भगवान के नज़दीक बहुत बड़ा है और पैगंबर (PBUH) ने हर मोमिन को इस बात की सलाह दी है.
नोट्स, रवायत कि मिस्र के पूर्व मुफ्ती ने अली (अ.स) से बयान की है किताब"ऐहक़ाक़ुल हक़ जिल्द, 29 पेज 410 " में उद्धृत किया गया है कि लेखक ने 400 से अधिक साल पहले इस पुस्तक को लिखा है और 1019 में एएच में निधन हो गया, अयातुल्ला Marashi  ने इस पुस्तक को पुनर्जीवित किया है.
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