कुरआन समाचार(IQNA)असफहान शाखा, के अनुसार हज़रत मासूमा ने 173 हि.मे मदीना शहर मे ऐसे माहौल में आखें खोलीं,जहां मां बाप भाई बहन सभी फ़ज़ाएल से आरास्ता थे,
पिता इमाम काज़िम की शहादत के बाद भाई इमाम रज़ा ने आप की शिक्षा और पालनपोषण की जिम्मेवारी ली
ज्ञान व एख़लाक के लेहाज़ से आप इमाम रज़ा के बाद खानदान मे सब से आगे थीं,और यह बात आप के नाम ,अल्क़ाब,और सिफात से ज़ाहिर है.
ईमाम सादिक़ फरमाते हैं होशयार होजाओ अल्लाह का मोहतरम शहर मक्का है रसूल का हरम मदीना,हज़रत अली अ. का हरम कूफा है और मेरा व मेरी औलादों का हरम क़ुम है,क़ुम हमारे लिऐ छोटा कूफा है जन्नत के 8 दरवाज़े हैं तीन क़ुम की तरफ खुलते हैं
हमारी नस्ल से ऐक बेटी जिस का नाम फातिमा होगा यहां दफ्न होगी और हमारे शियों की शिफाअत कराएगी
आप क़ुममे आने के17 दिनबाद वफात पा गयीं।
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