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मुबाहेला कुरानी वास्तविक्ता

8:15 - December 14, 2009
समाचार आईडी: 1860774
पुण्य प्रमाणपत्र अहलेबैत (अ.स.)की फ़ज़ीलत परः
24ज़िल्हिज्जा को इस्लामी इतिहास का सबसे गौरवशाली कारनामा Mubahelah के रूप में हुआ.जो दुनियाऐ इस्लाम के लिऐ एक विशेष रूप से अमर विरासत के तौर पर बाक़ी रहा है.
मुबाहेला फ़ल्सफ़े और घटना के के ऐतेबार से ग़दीरे ख़ुम से बहुत क़रीब है. क्योंकि पैगंबर ने इस दिन पृथ्वी के सबसे अच्छे लोगों को ईसाईयों केसामने ले आऐ,और इस तरह आपने अपने से करीबी लोगों को पहचनवा दिया,इस लिऐ मुबाहेले को दूसरी ग़दीर कह सकते हैं.
मुबाहेले का दिन सभी इस्लामी धर्मों के बीच पासवर्ड और एकता का प्रतीक हो सकता है क्योंकि यह वाक़ेआ सनद के ऐतेबार से कुरान की तरफ़ निस्बत रखता है, और तमाम विश्वसनीय सूत्रों जैसे तफ़सीर, इतिहास,व इस्लामी हदीसों ने इस घटना की ओर इशारा किया है और इस शानदार आयोजन को अहलेबैते मुहम्मद अ.स की आध्यात्मिक महानता व पाकीज़्गी पर स्पष्ट प्रमाण पत्र दे दिया है
24ज़िल्हिज्जा मुबाहेले के दिन के नाम से बुलाया जाता है.
मुबाहेले का मतलब एक दूसरे को अभिशाप और लानत करना है.
हिजरत के दसवीं वर्ष Najran (सऊदी अरब के दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र)के इसाईयों का ऐक समूह मदीने पवित्र पैगंबर (Salallah Valh) के पास आया और हज़रत मसीह के बारे मे बात करने लगापैग़ंबरे इस्लाम (Salallah Valh) ने कहा कि हज़रते ईसा अल्लाह के बन्दे व उसका कलमा थे जिसे मरयम के पास पहुंचाया था,
ईसाइयों का कहना है: कैसे मानव दुनिया में बिना बाप के आ सकता है ?
इस बारे में कुरान की आयत आई कि ईसा की मिसाल आदम जैसी है जो मां,बाप के बिना भगवान के हुक्म से पैदा हुऐ थे
जब अक़्ल व दलील से काम न चला तो भगवान के हुक्म से मुबाहेले क प्रस्ताव रखा, यानी दो गुट ऐक जगह जमा हों और परमेश्वर से प्रार्थना करें कि सच ज़ाहिर होजाऐ और झूठ बोलने वालों पर भगवान का अभिशाप व लानत करें.
मुबाहेले की आयत: فَمَنْ حَاجَّك فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَك مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَ أَبْنَاءَكمْ وَ نِساءَنَا وَ نِساءَكُمْ وَ أَنفُسنَا وَ أَنفُسكُمْ ثُمَّ نَبْتهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَة اللَّهِ عَلى الْكذِبِينَ.» ال عمران(61)

"इल्म आने के बाद जो आप से झगड़ा करे तो आप उन से कह दें तुम अपने बच्चों को लाओ हम अपने बचचों को,तुम अपनी औरतों को हम अपनी औरतों को लाऐं,तुम अपने नफ़सों को ,हम अपने नफ़सों को लाऐं फिर सब मिल कर झूटों पर लानत करें.

24 ज़िल्हिज्जा के दिन, पैगंबर (PBUH) अली Morteza, हसन,हुसैनऔर फ़ातेमा Zahra को लेकर मुबाहेले के लिऐ निकले ईसाई भी आऐ,पणुं जब उन लोगों ने अहलेबैत अ.स.की शानदार उदारता और जलाल को देखा था,तो डर गऐ और मुबाहेले से मना कर दिया. बिशप ईसाई ने Pyambare-islam से कहा: हम आप से मुबाहेल हीं करेंगे बल्कि समझौता करेंगे.और उन लोगों ने फिरौती भुगतान और इस्लामी सरकार के साऐ मे शांती से रहने को स्वीकार कर लिया.
अंतिम खंड में ईद Mbahlh के पुनर्जनन मनाने की आवश्यकता को देश के अंदरऔर बाहर लोगों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है.
1 मुबाहेले के विषय पर ग्रंथों और लेख व अनुवाद के माध्यम से संकलित जानकारी देना,
2) ईद मुबाहेला की खुशी मे जोत स्मृति, स्पीचेस,और शेर व शाएरी अहलेबैत अ.स. की शान मे रखना,
3 साहित्यिक कविता और थियेटर के माध्यम से घटना को बताना,
4) प्रतियोगिताऐं आयोजित करना.

मोहम्मद रज़ा सालेह محمد رضا صالح

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