कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के अनुसार, न्यूज नेटवर्क "Rasd उद्धृत के हवाले से, कुफ्र का फ़त्वा जारी करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुऐ सऊदी मजलिस मे मानव अधिकार आयोग के सदस्य "ज़ुहैर अल-हारसी"ने का फ़त्वा देने वाले उन मुफ्तियों के विरुध जो सऊदी धार्मिक संस्थाओं से बाहर हैं आपराधिक बताने वाले कानून को विधान सभा में पारित करने की मांग की है.
उन्हों ने सऊदी अरब विधानसभा मे इस मांग का कारण बताते हुऐ कहा कि कुफ्र के फ़त्वे इस्लाम के उसूल व बुन्यादी बातों को गंभीर नुक़सान पहुचाने का कारण हुऐ हैं और मुस्लिम ऐकता ऐवं सऊदी अरब के विभिन्न देशों से मेलजोल पर प्रभावित हुऐ हैं.
उन्हों ने सऊदी संसद से मुस्लिम ख़ून की हिफ़ाज़त के लिऐ सख़्त कदम उठाऐं और कार्यों से जो इस्लाम के चहरे को बिगाड़ रहे हैं मना करें.
अगर यह क़ानून अरब सऊदी संसद में पारित होजाऐ तो पहला औपचारिक कदम होगा कुफ्र के फ़त्वों को रोकने का, लेकिन इस अधिनियम में जो भ्रम की स्थिति है वह यह कि "क्यों सऊदी धार्मिक संस्थानों के भीतर रह कर जो मुफ़्ती शियाओं के खिलाफ कुफ्र का फ़त्वा जारी करते हैं वह दोषी नहीं हैं ?
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