कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के अनुसार, साइट जानकारी"मुहीत"के हवाले से, जर्मनी में इस्लामी संगठनों ने बर्लिन प्रशासनिक कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुऐ घोषणा की: यह आदेश जर्मन संविधान, कि जिस में धार्मिक अनुष्ठान के प्रदर्शन में व्यक्तियों की स्वतंत्रता को सिद्धांतों के साथ नियम जाना है के विपरीत है.
दूसरी ओर, बर्लिन में शिक्षा विभाग ने इस आदेश का स्वागत किया और कहा: जर्मन शैक्षिक संस्थाऐं धार्मिक तटस्थता के सिद्धांत पर काम करती हैं और यह आदेश स्कूलों में धार्मिक तटस्थता के सिद्धांत का पालन करने में ऐक कार्रवाई है(!)
मालूम रहे कि बर्लिन प्रशासनिक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 27 मई को एक निचली बर्लिन अदालत को जारी किया, जिसमें एक 16 वर्षीय मुसलमान छात्र को अपने स्कूल के कमरे में अनुमति दी गई थी कि उस कक्ष को नमाज़ रूम के रूप में इस्तेमाल करे,कहा यह उल्लंघन है और दावा किया: कि स्कूल जो विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के छात्रों से बनता है सीखने और शिक्षा पर्याप्त करने के लिए धार्मिक तटस्थता बनाए रखना आवश्यक है और नमाज़ पढ़ना स्कूल के सिस्टम का उल्लंघन है (!)
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