कुरान समाचार एजेंसी (IQNA)के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अखबार "अश्शर्क़अल Awsat"के हवाले से, "हुदा अल-काशिफ़" अल अज़हर में मजमऐ इल्मी कुरान व सुन्नत अनुसंधान महिला स्टाफ की सदस्य ने कहा: कुरान की तिलावत विशेष Tajvidi विधि मोहताज है"तरक़ीक़" (यानि पतली ऐवं नाज़ुक आवाज़)की और तरख़ीम(य़ानि सख़्त ऐवं मोटी आवाज़)की और महिलाऐं अगर रेडियो और उपग्रह नेटवर्क पर Tajvid विधि से कुरान की तिलावत करेंगी तो अपनी आवाज़ को मोटा व पतला करें जिस से श्रोताओं के ऊपर असर हो व प्रभावित करें और यह ख़ुसूसियत महिलाओं में पुरुष के मुक़ाबिल मौजूद नहीं है.
अली Najjar ", अल अज़हर विश्वविद्यालय में अरबी भाषा विभाग के स्कूल मे विद्वान ने भी इस बारे में घोषणा की: महिलाऐं केवल उन हलकों में जहां महिलाओं की उपस्थित हो और कुछ ख़ास अवसरों पर जैसे रमजान के महीने में और ख़त्मे कुरान की महफ़िलें आयोजित होती है कलामे इलाही की तिलावत कर सकती हैं.
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