कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के अनुसार, साइट जानकारी « saffar.org » के हवाले से,उन्होंने इस किताब में मानव अधिकार के प्रति इस्लाम के समर्पण और ताकीद की ओर इशारा करते हुऐ कहा: "इस्लाम सभी मुद्दे से पहले, मानव अधिकारों को बयान किया है और पैगंबर (स.व. )ने कुरानी आयात के आधार पर इस बात की तरफ़ विशेष ज़ोर दिया है.
क़तीफ़ जूमे के Khatib ने उम्मते इस्लामी के मानव अधिकारों से दूर होने को ऐक समस्या कहा और खेद व्यक्त किया:
उन्होंने इस पुस्तक में जोर दिया कि इसी वजह से बहुत से न्यायविद(फ़ुक़ीहों)ने अपने नीति अनुसंधान से राजनीतिक बहसों को हटा दिया ता कि मौजूदा अत्याचार से टच ना रहें और समुदाय के सार्वजनिक मुद्दों से दूर होने को चुन लिया.
इस प्रमुख शिया शख़्सियत ने पुस्तक के अंतिम भाग में, मदरसो और इस्लामी केन्द्रों को मानव अधिकारों की शिक्षा के लिए आमंत्रित किया और न्यायविद (फ़ुक़ीहों)से अनुरोध किया कि मानव अधिकारों के मुद्दों को अपने दर्स में अधिक तवज्जोह दें.
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