ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) शाखा किर्गिस्तान गणराज्य के मुताबिक़, किरगिज़ गणतंत्र मुफ़्तियत कार्यालय ने सभी न्यायाधीशों और देश की मस्जिदों के इमामों को यह संदेश दिया कि मस्जिदों में राजनीति के बारे में राय का इज़्हार,ऐवं राजनीतिक मामलों और घटनाओं में हस्तक्षेप न करें.
किर्गिस्तान मुसलमानों की मोलवियों की परिषद की दृष्ट इस देश के संविधान अनुसार धर्म और सरकार की जुदाई पर है तो इसी लिऐ विद्वानों का राजनीतिक में शामिल होना अवैध हो जाएगा.
फैसले के आधार पर,वह किरगिज़ राजनीतिक पार्टियां जो कि अगले सप्ताह 10 अक्टूबर को चुनाव में भाग लेरही हैं,उनको अपनी पार्टी के विज्ञापन में इस्लामी शिक्षाओं और अक़ीदती और धार्मिक प्वाइंटो को इस्तेमाल करने क कोई अधिकार नहीं है (!)
यह हुक्म इस के अलावा कि किर्गिस्तान की मस्जिदों के सभी ख़तीबों और वाऐज़ों को दिया गया है देश में मस्जिदों के दरवाज़ों पर स्थापित कर दिया गया है.
यह उल्लेख के लायक है कि किरगिज़ गणतंत्र की आबादी जो कि 5 मिल्यून है मुस्लिम 75 प्रतिशत हैं और इस में 50 हज़ार प्रोटेस्टेंट और Ardtvdks ईसाई शामिल हैं है, कि 1991में सोवियत संघ के पतन के बाद रूस से अलग होगऐ थे.
606 666