IQNA

आज इमाम सादिक (अ.स.) के समय की तरह सांस्कृतिक जिहाद किसी भी जिहाद पर मुक़द्दम हैः

5:55 - October 05, 2010
समाचार आईडी: 2006661
सोच विभाग: ग्रैंड अयातुल्ला"Jafar Sobhani"ने अपने fiqh पाठ(दर्से ख़रिज)में इमाम Sadeq (अ.स.) के शहादत के अवसर पर कहा: आज, हमे इमाम सादिक (अ.स.) के समय की तरह सांस्कृतिक प्रयास करना चाहिए. इस वक़्त सांस्कृतिक जिहाद सभी जिहादों पर मुक़द्दम है,यानि खुद को ज्ञान ऐवं इल्म से तैय्यार करें.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA)के अनुसार, शिया ध्वनि सूचना के हवाले से, ग्रैंड अयातुल्ला "Jafar Sobhani", ने पाठ के अंत में इमाम Sadeq (अ.स.) की शहादत के बारे में कहा: इमाम सादिक (अ.स.) के समय में अब्बासियों ने उमवियों की तलवार के ज़ोर को नष्ट कर दिया, लेकिन हुकूमत सांस्कृतिक रूप से उमवी ही थी.

इस मरजऐ तक़्लीद ने कहा: उमवियों ने अपनी हुकूमत की अवधि में परमेश्वर के क़ानून को बदल दिया था और अनेक ग़लत रवायात बनाई गईं लेकिन उल्लेखनी है कि अब्बासियों ने पाखंडी व्यवहार किया, यानि इस्लामी और धार्मिक नारे के साथ उमवियों से युद्ध करने के लिए निकले.

ग्रैंड अयातुल्ला Sobhani ने नोट कराया:कि इमाम सादिक (अ.स.) समझ गऐ कि इस समय, बुनियादी ढांचे की सांस्कृतिक दृष्ट से इस्लाह करनी चाहिऐ, और समय को भी अनुकूल जाना,इस लिऐ सांस्कृतिक कार्य शुरू किया और अपना ऐक महान विश्वविद्यालय खोला जिसमें 4000 लोगों की तर्बियत की. बेशक उन सभी नाम, को अज्ञात है, लेकिन लगभग तीन हजार लोग जिनके नाम स्पष्ट हैं.
ग्रैंड अयातुल्ला Sobhani ने बल दिया: आज, हमे इमाम सादिक (अ.स.) के समय की तरह सांस्कृतिक प्रयास करना चाहिए. इस वक़्त सांस्कृतिक जिहाद सभी जिहादों पर मुक़द्दम है, ऐसा करने में सक्षम होने के लिए खुद को ज्ञान ऐवं इल्म से तैय्यार करना पड़ेगा.
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