ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के अनुसार, आधिकारिक कुवैत न्यूज एजेंसी (Kvna)के हवाले से, " नवारल हुसैनी, फिलिस्तीनी विद्वान और विश्वविधालय ",अलअमीरा समीयह" जॉर्डन के प्रोफेसर ने 15 अक्टूबर को सम्मेलन में विषय "इस्लाम में लोकतंत्र की अवधारणा और उसका संबंध पश्चिम से"जो स्विट्जरलैंड में आयोजित की गई है ऐक भाषण में, इस घोषणा के साथ कहा: इस्लाम, परामर्श के सिद्धांत पर निर्भर होते हुऐ जो कि व्यक्तियों और उनकी सुरक्षा के अधिकारों को शामिल है,लोकतंत्र की अवधारणा एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करता है.
उन्होंने कहा: पश्चिमी लोकतंत्र मानव निर्मित है, तो इस लिऐ विभिन्न उम्मीदवारों पर आधारित इस की व्याख्या बदलने की क्षमता और संकल्पना है लेकिन एक इस्लाम में लोकतंत्र सिद्धांतों और मूल्यों पर आधारित है कि इन सिद्धांतों की पलट हक़ तआला की ओर है.
अंत में उन्होंने कहा: "हकीकत यह है कि सभी अंतरराष्ट्रीय संगठन मानवीय और राजनीतिक मुद्दों में निष्पक्ष नहीं हैं और यही बात समस्या का कारण है कि अपनी मिस्दाक़ियत को हाथ से दे दिया है उदाहरण के लिऐ संयुक्त राष्ट्र संघ के फिलिस्तीनी मुद्दे में सारे फ़ैसले आज तक कार्यकारी नहीं होसके.
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन'इस्लाम में लोकतंत्र की अवधारणा और उसके पश्चिमी देशों के साथ संबंध' बुधवार 13 अक्टूबर से स्विट्जरलैंड, अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इस्लामी दुनिया, और कुछ एशियाई, अफ्रीकाई और लैटिन अमेरिका के देशों से 120 से अधिक विचारकों, विद्वानों और विशेषज्ञों,की उपस्थित में शहर "Anglbrg» स्विट्जरलैंड की अकादमी में शुरू हुआ में और आज 15 अक्टूबर को अपने काम को समाप्त करदिया.
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