ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के अनुसार, मिस्री अखबार "अल-यौमुस्साबे,के मुताबिक़, मिस्र के ईसाइयों के नेता ने इस प्रतिबंध की घोषणा के साथ, कहा: "अल कुद्स शरीफ फिर अपनी फिलिस्तीनी मालिकों को वापस किया जाना चाहिए, इसी तरह फिलिस्तीनी वीजा पर अल कुद्स के लिए कूच करना चाहिऐ ".
उन्होंने कहा: "मैं सिर्फ फिलिस्तीनी वीज़ा पर अल कुद्स शरीफ की यात्रा करूंगा, और मैं किसी भी बिशप को अनुमति नहीं दूंगा कि यहूदी शासन के वीज़े के साथ अल कुद्स के लिए जाए.
दूसरी ओर "मोहम्मद सलीम अल्अवा, मुस्लिम विद्वानों की विश्व संघ के महासचिव, ने मिस्री ईसाई नेता के निर्णय का स्वागत करते हुऐ कहा:" पोप Shnvdh के इस राष्ट्रीय स्टंड, सम्मान किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा: "मुसलमान भी धार्मिक दृष्ट इजरायल वीसा के साथ फिलिस्तीन की यात्रा करे जाऐज़ नहीं है, भले ही काम की परिस्थितियों इसका तक़ाज़ा ही क्यों न करती हों क्योंकि फिलिस्तीन के लिए यात्रा यहूदी शासन के वीज़े पर, एक तरह का ग़ासिब शासन को अधिकारिक तौर मान लेने की राह में ऐक क़दम होगा.
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