सुप्रीम नेता का बैतुल्लाहल हराम के तीर्थयात्रियों के लिए संदेश:
आज इस्लामी बेदारी आंदोलन बढ़ने की हालत और अग्रिम पंति में हैः
राजनीतिक समूह: आज इस्लाम विरोधी मोर्चा कि दो सदियों से इस्लामी सरकारों और जातियों पर दमनकारी हुकूमत करता था और उनके संसाधनों को लूट लेता था अपने प्रभाव के गिरावट ऐवं इस्लामी आंदोलन के बहादुराना प्रतिरोध को अपने खिलाफ देख रहा है और उनके विपरीत इस्लामी बेदारी आंदोलन अग्रिम और बढ़ने की हालत में है.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA)के अनुसार, तीर्थ स्थल जानकारी साईट के हवाले से, मुश्रिकीन के भव्य समारोह में जो कि सऊदी अरब के सय के मुताबिक़ सुबह 9:30 शुरू हुआ सूरऐ बराअत की इब्तेदाई कुछ आयतों की तिलावत के बाद, सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि और ईरानी तीर्थयात्रियों के सरपरस्त ने ईरानी तीर्थयात्रियों को सुप्रीम नेता का सलाम पहुचाने के साथ हज के अनुष्ठान और विभिन्न कार्यक्रमों को बजा लाने में नज़्म व पालन करने पर प्रशंसा और धन्यवाद दिया.
फिर सुप्रीम सर्वोच्च नेता के पूरा संदेश Hojjatoleslam "क़ाज़ी अस्करी" द्वारा पढ़ा गया.
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
و الحمد لله رب العالمين و صلی الله علی سيدنا محمد المصطفی و أله الطيبين و صحبه المنتجبين
काबा एकता और इज़्ज़त का राज़, तौहीद और मानवीयत की निशानी, हज के ज़माने मे चाहत रखने
वाले और उम्मीद रखने वाले दिलों का मेज़बान है कि जिसकी तरफ़ पूरी दुन्या के लोग अल्लाह की दावत
पर लब्बैक कहते हुए इस्लाम की जन्मभूमी की तरफ़ दौड़ते हुए आए हैं। इस्लामी उम्मत इस वक़्त अपने
बेमिसाल और लाजवाब होने को उस गहरे ईमान कि जो दीने हनीफ़ के मानने वालों के दिलों पर हुकूमत
करता है, उसकी छोटी सी तस्वीर को दुन्या के चारों कोनों से आए हुए लोगों की शक्ल मे देख सकती है
और इस बहुत बडी नेमत को सही तरह से पहचान सकती है।
ये अपने आप की पहचान इस बात में मदद करती है कि मुसल्मान आज और आने वाले दिनों में
इज़्ज़त की जगह बना सके और उस की तरफ़ बढे।
आज की दु्नया मे इस्लामी बेदारी की लहर एक ऐसी हक़ीक़त है कि जो उम्मते इस्लामी को अच्छे कल
की ख़ुशख़बरी सुना रही है। तीन दशक पहले कि जब इस्लामी इंक़लाब की कामयाबी और इस्लामी गंणतंत्र
ईरान की हुकूमत बनी, ये ताक़तवर क्रांती शुरू हुई। हमारी अज़ीम उम्मत ने बग़ैर समय गुज़ारे आगे बढते हुए और
तमाम रुकावटो को हटाते हुए कई मोरचों पर विजय प्राप्त की। साम्राजी ताक़तो की दुशमनी के तरीक़ों का
और पेचीदा हो जाना और इस्लाम के मुक़ाबले में हर तरह की नीति का प्रयोग करना भी इस तरक़्क़ी के
नतीजे में है। इस्लाम से ख़ौफ़ज़दा करने के लिये किये जाने वाले प्रचार, इस्लामी फ़िरक़ों के दरिमयान
कोशिश, शीयो के ख़ेलाफ़ सुन्नियों को और सुन्नियों के ख़ेलाफ़ शीयों को झूठे प्रचार से एक दूसरे का
दुश्मन बनाना, इस्लामी हुकूमत के बीच टकराव पैदा करना और एख़्तेलाफ़ को गहरा करते हुए दुश्मनी और
नाक़ाबिले हल झगड़े में बदलने की कोशिश, जासूसी एजेंसियों के ज़रये जवानों के बीच बुराई फैलाने के
लिये इस्तेमाल करना ये सब के सब इस्लामी उम्मत के आगे बढने और इज़्ज़त, बेदारी और आज़ादी की
तरफ़ साबित क़दमी के साथ बढने का, घबराया हुआ और परेशान हाल रिएक्शन है।
आज तीस साल पहले के बर ख़ेलाफ़ इज़राईली (ग़ासिब)हुकूमत नाक़ाबिले शिकस्त ड्रैकुला की तरह नही है।
बीस साल पहले के बर ख़ेलाफ़ अमरीका और यूरोपी मिडल ईस्ट देश बग़ैर रोक टोक के
फ़ैसला करने के क़ाबिल नही रहे। दस साल पहले की तरह परमाणु परीक्षण केन्द्र, दूसरी नयी टेक्नालाजियाँ,
इलाक़े के मुसलमानो के लियऐ उनकी पहुँच से दूर और ख़याली चीज़ नही रह गयी है। आज फ़िलिस्तीनी क़ौम
अपनी पायेदारी और इस्तैक़ामत की राह में फ़ातेह की हैसियत रखती है। लेबनानी क़ौम अकेले ही इज़राईली
हैबत के घेराव को तोडने वाली और ३३ दिन की जंग की फ़ातेह है। और ईरानी क़ौम बुलंदी की तरफ़ बढते
हुए क़ाफ़ले की परचम दार है।
आज ज़ालिम अमरीका इस्लामी इलाक़ो का मुहँ बोला हाकिम और इस्राईिलयों का अस्ली पुश्त पनाह
अफ़्गानिस्तान में अपने बिछाए जाल में फस चुका है। ईराक़ में उन तमाम ज़ुल्मों के साथ जो उसने इस
देश के लोगों पर किये हैं बिखर जाने के कगार पर है। मुसीबत ज़दा पाकिस्तान में पहले से ज़्यादा नफ़रत
की निगाह से देखा जा रहा है। आज इस्लाम मुख़ालिफ़ मोर्चा कि जो दो सदयों से इस्लामी क़ौमों और
हुकूमतों पर ज़ालिमाना क़ब्ज़ा किये हुए थे उनके क़ुदरती ख़ज़ानों को हडप लेते थे। अपनी दख़ल अंदाज़ी के
कम