IQNA

9:33 - December 01, 2010
समाचार आईडी: 2040603

दोहा सम्मेलन में कुरान के माध्यम से इस्लाम को समझने पर जोर

अंतरराष्ट्रीय समूह: दोहा सम्मेलन ' इस्लाम शांति के लिए ' में ज़ोर दिया गया कि इस्लाम धर्म को इस पवित्र आस्मानी किताब कुरान और पैगंबर मोहम्मद (PBUH)की सीरत से पहचान्ना चाहिए और लोगों का व्यवहार इस्लाम पहचान्ने का मापदंड नहीं है.

ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA)के अनुसार, समाचार पत्र « The Peninsula » प्रिंट कतर के हवाले से, "शेख मोहम्मद दानयाल, ब्रिटेन में मुस्लिम लेक्चरर और विद्वान ने दोहा सम्मेलन "शांति के लिए इस्लाम" में यह व्यक्त करते हुऐ कहा: इस्लामी मान्यताओं की बुन्याद न्याय पर और समानता है, किसी भी परिस्थिति में जिस पर अमल होना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा: इस्लाम में न्याय और प्यार के रूप में मान्यताऐं केवल मानव के लऐ मख़्सूस नही हैं सभी प्राणियों यहां तक कि पर्यावरण के लिए भी अद्वितीय हैं कोई भी कार्रवाई जोकि पर्यावरण के लिऐ हानिकारक हो मना किया जाता है.

चन्द्र मोहन दास भारत "केरल"सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील, ने भी सम्मेलन में घोषणा की: पवित्र कुरान की शिक्षा एक सरल और व्यावहारिक है और सभी के लिए स्पष्ट है कि इस्लाम हमेशा शांति और न्याय का था अधिवक्ता, इसलिए कुछ मुस्लिम कट्टरपंथ के कामों को इस से संबंधित करना अनुचित है.

सम्मेलन 'शांति के लिए इस्लाम' कतर में रहने वाले भारतीय के इस्लामी द्रव्यमान सुधार केंद्र द्वारा और कतर के कुछ इस्लामी संगठनों के साथ सहयोग से 26 नवम्बर शुक्रवार दोहा में आयोजित किया गया था.
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