IQNA

छात्रों की अंतर्राष्ट्रीय कुरान प्रतियोगिताएओं के बारे में सूचना संतोषजनक है

8:44 - December 06, 2010
समाचार आईडी: 2042920
इंटरनेशनल समूह: मुस्लिम छात्रों के तृतीय अंतरराष्ट्रीय कुरान टूर्नामेंट के बारे में प्रयास सूचना संतोषजनक और यह काम ईरानी अधिकारियों के क़ुरान कार्यक्रमों को लागू करने के शीर्ष महत्वता को दर्शाता है.
मुस्लिम छात्रों के तीसरे अंतरराष्ट्रीय कुरान टूर्नामेंट में मिस्र का प्रतिनिधित्व करते हुऐ शरीक 18 वर्षी मोहम्मद Niyazi ने ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के साथ एक साक्षात्कार में यह घोषणा करते हुऐ कहा: मुस्लिम छात्र कुरान टूर्नामेंट आयोजक समिति, ने प्रतिभागियों को टूर्नामेंट की जानकारी के बारे में बहुत अच्छी तरह से अवगत किया है, कि इस टूर्नामेंट की शैली, समय और स्थान के हवाले से कोई समस्या नहीं थी.

मोहम्मद नयाज़ी ने बातचीत जारी रखते हुऐ पवित्र कुरान के हिफ़्ज़ शैली सीखने के बारे में आगे कहा:मैं ने बच्पन ही से अपने पिता के समर्थन से हिफ़्ज़े क़ुरान की शुरुआत की और 7 साल की उम्र में पवित्र कुरान को याद कर लिया था और पवित्र कुरान के हिफ़्ज़ करने में शेख मुस्तफा इस्माइल की क़िराअत शैली मेरा मॉडल थी.

उन्हों ने मिस्र में पवित्र कुरान प्रतियोगिता के तरीक़ों के बारे में कहा: हर वर्ष रमजान में अंतर्राष्ट्रीय कुरान प्रतियोगिताएं मिस्र में आयोजित की जाती है कि मैं ने अब तक एक बार इस टूर्नामेंट में भाग लिया है, क्योंकि मिस्र में कुरान प्रतियोगिता के लिऐ कानून है कि हर प्रतिभागी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में केवल एक बार भाग ले सकता है.

मोहम्मद Niyazi ने कहा: पहली बार है कि मुस्लिम छात्रों की अंतरराष्ट्रीय ईरानी पवित्र कुरान प्रतियोगिता के हिफ़्ज क्षेत्र में भाग लिया, और इस से पहले मैं ने दसवें अंतरराष्ट्रीय कुरान टूर्नामेंट 'पुरस्कार दुबई'अमारात में भाग लिया था जहां मैं ने इस प्रतियोगिता के Quranic आवाज सबसे सुंदर पुरस्कार में दूसरा स्थान हासिल किया था.

मोहम्मद नयाज़ी का मिस्र पूर्वी प्रांत के गांव "अवलादे सक़र" में जन्म हुआ था कि 7साल की उम्र में पवित्र कुरान को याद कर लिया, वह चाहते हैं कि अपनी शिक्षा को अल अजहर विश्वविद्यालय कुरानी विज्ञान संकाय में खत्म करें और विशिष्ट तरीक़े से सातों व दसों क़िराअतों के क्षेत्र में समीक्षा और कुरान की व्याख्या मे अनुसंधान करें.

इस युवा मिस्री हाफिज कुरान,ने हिफ़्ज़े कुरान में धैर्य बनाए रखने और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता पर ज़ोर पर दिया और उनका मानना है कि बचपन में कुरान का याद करना बहुत आसान है क्योंकि बच्पन में अधिक तय्यारी रहती है कि जो पेशकश की जाऐ उसे तेजी से सीख सकता है.
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