ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के अनुसार, अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से, मलेशिया में धार्मिक अधिकारी केवल सुन्नी मुसलमानों को जो कि मलेशियाई आबादी का 2 तिहाई हैं, मोटे तौर पर उनके धार्मिक कामों को आज़ादी से करने की रज़ा देते हैं और शिया सहित अन्य इस्लामी धर्मों की गतिविधियों को, अवैध मानते हैं
मलेशिया में इस्लामी अधिकारियों ने इस महीने के शुरू में, मलेशिया के मध्य भाग में एक प्रार्थना समारोह में 200 से अधिक शियाओं को गिरफ्तार कर लिया था जो हाल में अपनी तरह की सबसे व्यापक गिरफ्तारी थी.
" मोहम्मद शानी अब्दुल्ला, ह्यूमन राइट्स वॉच के एक सदस्य ने कहा है कि शिया प्रतिनिधियों के 30 लोग इस सप्ताह मानव अधिकार आयोग को जो मलेशिया सरकार द्वारा समर्थित है ऐक याचिका दी है और शियों पर से प्रतिबंध रोकने की अपील है.
कामिल Zuhair अब्दुल अज़ीज़, एक शिया प्रतिनिधि इस याचिका में, जो कि इंटरनेट साइटों पर भी आगई है लिखा: यदि अन्य अल्पसंख्यक स्वतंत्र हैं तो फिर क्यों हमलोग मलेशिया पूर्वजों की मान्यताओं का पालन करने के लिए हिंदू, बौद्ध, ईसाई, और सिखों की तरह• स्वतंत्र नहीं और हमारा मज़ाक़ उड़ाते हैं व बदनाम करते हैं?
मुहम्मद शानी ने कहा: मानवाधिकार आयोग कोशिश कर रहा है कि इस्लामी व सरकारी अधिकारियों और शिया मुसलमानों के बीच एक बैठक की व्यवस्था कराऐ ताकि एक शांतिपूर्ण समझौते तक पहुँच सकें.
मुहम्मद शानी ने इस बयान के साथ कि 28 करोड़ मलेशियाई आबादी में हजारों, शिया हैं, कहा: कुछ शियाओं ने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं से कहा कि हाल के वर्षों के दौरान समस्याओं को रोकने के लिए मजबूर थे कि अपने विश्वासों को छिपा कर रहें और औपचारिक तौर पर धार्मिक अभ्यास के लिए जगह भी नही रखते थे.
मलेशियाई सरकार ने बार बार धार्मिक भेदभाव से इनकार किया और कहा कि यह देश उदार इस्लामी के लिऐ पैटर्न है, लेकिन मलेशियाई शियों के लिए अधिकारियों द्वारा प्रतिबंध इस दावे को प्रश्न में लेता है.
720286