राजनीतिक और सामाजिक समूह: "सौयद अली Fazlollah, बेरूत ख़तीबे जुमा ने, 31 जनवरी, को बल दिया: कि इस्लामी उम्मा जो क्षमता रखती है उसको मुसलमानों के हितों और इस्लामी एकता को संगठित करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) शाखा लेबनान, साइट जानकारी lebanonfiles के हवाले से, सै.अली Fazlollah ने 31 जनवरी को शिविर सूर के विद्वानों के एक प्रतिनिधिमंडल जो कि शेख "मोहम्मद अब्दुल आल", की अध्यक्ष्ता में बैठक में भाग लेने आऐ थे मिले,इस मुलाक़ात में लेबनान में स्थिति फिलिस्तीनियों की स्थिति और इस देश में उनके शिविरों, लेबनान और इस्लामी दुनिया की हालत और अरबी देशों, से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की.
उन्होंने जारी रखते हुऐ कहा: यह मुस्लिम उम्मा की क्षमता का मान करते हुऐ, इस क्षमता को मुस्लिम उम्मा की एकता की रक्षा और विकास के संबंध में ज्यादा इस्तेमाल करें.
सै.अली Fazlollah ने कहा: कुछ अरबी देशों में वर्तमान घटनाऐं और संकट ने फिलिस्तीन के सवाल को पुनर्जीवित कर दिया है है और उसकी रक्षा के लिए एक नए आंदोलन को पैदा करदिया है.
अंत में, उन्हों ने दोहराया: दुश्मनों को अनुमति नहीं देनी चाहिऐ कि मुसलमानों के बीच प्रभाव स्थापित करें और धार्मिक तनाव को जनम दें.
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