ईरान की कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) शाखा अफगानिस्तान ने बताया कि बयान के इस भाग में चर्चा करते हुए मध्य पूर्व और संयुक्त राष्ट्र के घटनाक्रम को कुछ बङी शक्तियों का समर्थन और एक प्रकार का पाखंड और अवसरवाद बताया मिस्र,लीबिया, ट्यूनीशिया, यमन,जॉर्डन और बहरीन देशों के लोगों के अधिकार की आवाज को कि जो आज संयुक्त राष्ट्र परिषद और कुछ बङी शक्तियों के ज़रिए हो रहा है यह एक प्रकार का पाखंड और अवसरवाद है और पिछले कुछ दशकों से मौन और ज़ालिम सरकारों का समर्थन अफसोस की बात है
बहरीन, जॉर्डन और यमन में लोगों के क़्याम की उपेक्षा को अनदेखा करना और उन्हें दरकिनार करना जो शायद अर्थव्यवस्था और राजनीति से प्रेरित और यह बहुत चौंकाने वाला और संदिग्ध है.
अंत में अफगानिस्तान के शिया मौलवियों की परिषद ने बयान जारी रखते हुए आशा व्यक्त की कि मध्य पूर्व के लोग इस आंदोलन की शांति और एकता के साथ रक्षा करें
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