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लोगों को चाहिए कि अपने आमाल कुरानी तराज़ू पर तौलेंः

7:18 - March 30, 2011
समाचार आईडी: 2098982
Quranic गतिविधियों का विभाग:लोगों को चाहिए कि अपने कार्यों को कुरानी मीज़ान(तराज़ू)पर तौलें और यदि कुरान को सही ढंग से नहीं पहचान सके तो अपने को उस पर तौल नही सकते.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) शाखा इस्फहान, अयातुल्ला Javadi Amoli (म.ज़.आ.)ने 28 अप्रैल को दोपहर प्रार्थना के बाद ऐक बैठक में जो खोमैनी सिटी के क़ुरानी संरचनाओं की यूनियन के हितधारकों और प्रमुख सदस्यों के साथ इस्रा अनुसंधान सांस्कृतिक संस्था Qom की बिल्डिंग में आयोजित हुई नए साल की बधाई और कुरान कार्यकर्ताओं की प्रशंसा व धन्यवाद करते हुऐ कुरान की व्याख्या"तराज़ू" से की और कहा: पवित्र कुरान कई विशेषताएं रखता है:पहला यह कि कुरान"वज़ीन"है,यानि कुरान में किसी भी जगह कोई शब्द बे अर्थ के नहीं है परिणाम स्वरूप हमे अपने को कुरान के तराज़ू पर तौलना चाहिए.
उन्होंने कहा: यदि क़ुरान को सही ढंग से न पहचान सकें तो वास्तव में पैमाने को अच्छी तरह से नहीं पहचाना और इसलिए हम खुद को उस पर नाप भी नहीं सकते.
उन्होंने कहा: दूसरी विशेषता यह है कि कुरान"आसान" है इस लिऐ कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि हम कुरान नही पढ़ सकते हैं और कुरान में कोई एसा मतलब ही नहीं जिसे इन्सान थोड़ा सोच विचार व ग़ौर के बाद न समझ सके.
इस मरजऐ तक़्लीद ने कहा: क्योंकि कुरान "वज़ीन"है तो आलोचना के क़ाबिल नहीं और चूंकि "आसान" है तो कोई यह नहीं कह सकता कि हम लाभ नहीं लेसकते व उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि कुरान पुर माना"वज़ीन" है लेकिन भारी और कठिन नहीं और चूंकि प्रकृति के साथ समन्वय के रूप में है "आसान"है.
कुरान के महान मुफ़स्सिर ने कहा:अब जब कि निर्धारित होगया कि तराज़ू किया है तो वजन करना आसान हो जाऐगा और अपने को इस किताब के पैमाने पर नापें और जब वज़ीन काम करें तो भगवान के आभारी हों और अगर हम लोगों के साथ सख़्ती से मिलें तो तौबा करें और अगर हमारा बर्ताव आसान तो शुक्र करना चाहिऐ.
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