IQNA

बहरीन की घटनाओं ने पश्चिमी सरकारों के दोरंगे चेहरों से नक़ाब उलट दीः

5:50 - April 27, 2011
समाचार आईडी: 2112764
अंतरराष्ट्रीय समूह:बहरीन में अल खलीफा और आले सउद बलों द्वारा अपराधों पर पश्चिमी चुप्पी ने पश्चिमी सरकारों के हुकूमत तलब व मफ़ाद परस्त चेहरों से जम्हूरियत की नकाब को अलग कर दिया.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA)माचार सूत्रों के हवाले से,पिछले साल फ़रवरी से बहरीन में हजारों विरोधी लोग नारेबाजी करने के इरादे से गलियों व सड़कों पर आगऐ और इस देश में अल खलीफा के 40 साला शासन को समाप्त करने की मांग करने लगे, स्थानीय सूत्रों ने कहा कि इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल या गिरफ्तार कर लिऐ गऐ.
बहरीन बलों ने सऊदी सैन्य बलों की भागीदारी से मस्जिदों और शिया धार्मिक स्थलों को नष्ट करना शुरू कर दिया;बहरीन में अशांति की शुरुआत से बहुत से लोग मारे गए और गायब कर दिऐ गऐ, और 28 मस्जिदों और 18 अज़ादारी बोर्ड(इमाम बारगाहें) आले सउद और अल खलीफा बलों द्वारा नष्ट कर दिऐ गऐ हैं.
इसी तरह बहरीन सुरक्षा अधिकारियों ने जन विरोधी सरकार का विरोध करने वाले घायल लोगों का इलाज करने के जुर्म में अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों को गिरफ्तारी की धमकी दी तथा कुछ डॉक्टरों को जिन्हों ने घायलों की मदद की है एकान्त कारावास में डाल दिया या ग़ायब कर दिया.
बहरीन के प्रमुख उलमा ने एक बयान प्रकाशित करके,इस देश में बेशर्मी के साथ सऊदी और बहरीनी बलों द्वारा मस्जिदों को नष्ट करने की निंदा की, उन्हों ने इस बात पर ज़ोर देते हुऐ कि बहरीन में हाल की घटनाऐं इस देश के इतिहास में काला धब्बा है सऊदी और बहरीनी बलों द्वारा मस्जिदों तथा धार्मिक स्थानों का विनाश और अपमान धार्मिक और विचार की स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन बताया.
इस बीच,बहरीनी सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा शिया विरोधियों की हत्या और अत्याचार तथा मस्जिदों व पवित्र स्थानों के विनाश पर पश्चिमी सरकारों की चुप्पी चौंकाने वाली बात है बहरीनी निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ पश्चिमी सरकारों की बे तवज्जुही व पाखंड इन सरकारों की दो रंगी के स्पष्ट संकेत हैं, क्योंकि वे केवल उसी वक़्त जन आंदोलनों को अपना ज़ाहिरी व झूटा समर्थन देते हैं जब उनके हितों की लाइन में हो.
यह लगता है कि बहरीन में सऊदी अरब की कार्रवाई की आलोचना करने से अमेरिका का इनकार अरब में तेल संसाधनों पर पश्चिम की निर्भरता कई कारणों में से ऐक है,सऊदी अरब और अन्य फ़ारस की खाड़ी के देशों के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों खासकर ब्रिटेन और फ्रांस अपने तेल हितों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए,फ़ारस की खाड़ी देशों में पश्चिमी सरकारों की समर्थक सरकार जारी रखना चाहते हैं.
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