"कासिम Alhashmy,बहरीनी राजनीतिक कार्यकर्ता और इस देश के मज़्लूम लोगों के समर्थन के लिऐ वर्ल्ड गठबंधन के सदस्य ने ईरान कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के साथ एक साक्षात्कार में, कहा:बहरीनी प्रदर्शनकारियों को दबाने में आले ख़लीफ़ा की राजनीति राज्य आतंकवाद का स्पष्ट मिस्दाक़ है और यह शासन अपनी आतंकवादी कार्रवाई के चलते लाल लाइन पार कर गया है और मस्जिदों को क्षतिग्रस्त व कुरान का अपमान करके मुसल्मानों के मुक़द्दसात के सम्मान का क़ाएल नहीं.
Alhashmy ने जारी रखते हुऐ कहा:जब कोई नास्तिक कुरान को आग लगाता है तो भगवान का डर उसके पूरे अस्तित्व जकड़ लेता है,क्योंकि कलामे वहि पवित्र किताब है,प्रेरित है, लेकिन आले ख़लीफ़ा शासन है कि मुसलमान होने का दावा करता है,न केवल भय महसूस नहीं किया बल्कि अपनी आतंकवादी कार्रवाई इस हद तक पहुचा दिया बेझिझक मस्जिदों को नष्ट कर दिया और पवित्र कुरान को जला दिया.
कासिम Alhashmy जो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन"निष्पक्ष शांति के लिए आतंकवाद के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन" तेहरान में उपस्थित थे इस पर बल दिया: ऐसे सम्मेलन आतंकवाद से लड़ने की सोच के प्रकाशन और इसके विभिन्न रूपों से इनकार में प्रभावी है,ऐसा आतंकवाद कि मुम्किन है राज्य(सरकार)या खास व्यक्तिय और समूह उसके स्रोत हों.
उन्हों ने आतंकवाद का मुकाबला करने में इस्लामी संगठनों की भूमिका की ओर इशारा किया और उन इस्लामी संगठनों, मानवाधिकार व मानव संघो जो कम्ज़ोर और आतंकवादी संगठनों द्वारा लक्षित क़ौमो की मदद करने के लिऐ प्रयास करते हैं सराहना की.
अंत में,कहा:इस्लामी गणराज्य ईरान उन सक्रिय देशों में शामिल है जो आतंकवाद का मुकाबला करने के क्षेत्र में है,कि आतंकवाद विरोधी सम्मेलनों सहित विभिन्न कार्यक्रमों को लागू करके अपनी क्षमताओं और सभी प्रयासों को इस घटना का मुकाबला करने में ककाम में लाता है.
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