ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) जानकारी साइट "नून"के हवाले से, आले सउद शासन के अधिकारियों ने अपने अपमानजनक प्रस्ताव में घोषणा की: बहरीन का मौजूदा ध्वज देश की क्रांतिकारी राष्ट्र के प्रतीक में परिवर्तित होगगया है और उसका रंग और आकार बदल देना चाहिए.
आले सउद शासन ने जोर दिया: सऊदी सरकारी अधिकारियों और देश के राजनीतिज्ञ प्रतिनिधियों को बहरीन के लोगों के इन्तिफादा के समर्थन में विभिन्न देशों में बहरीनी झंडे लहराते हुऐ देख कर डर लगने लगा है.
आले सऊद ने इसी तरह बहरीनी संसद से जो देश के शिया प्रतिनिधियों से रहित है,मांग की कि बहरीनी झंडा बदलने का फैसला लेकर इस देश के इतिहास में एक नऐ दौर की शुरूआत करें.
सऊदी सरकार का प्रस्ताव,उस वक़्त पेश किया गया जबकि आले सऊद के सैन्य बहरीन पर हमला करके देश के जन आंदोलन का दमन अभियान जारी रखें हैं और यह प्रस्ताव बहरीनी राजा के बे ताल्लुक़ होने और इस सरकार के आले सउद राजशाही से संबद्धता को दर्शाता है.
इसी तरह यह प्रस्ताव साबित करता है कि बहरीन के आंतरिक मामलों में सऊदी भागीदारी इस हद तक पंहुच गई है कि बहरीनी झंडे के परिवर्तन मे ख़ुद को विशेषज्ञ समझने लगा और बहरीन के क्रांतिकारी लोगों के लिए किसी तरह के सम्मान के क़ायल नहीं.
न्यायालय बहरीन ने इसी तरह, 23 मई को इस देश के नागरिकों में से दो लोगों को फ़ंसी की राज्य और इस देश के पांच नागरिकों को जीवन कारावास की सजा सुनाई है.
यह उल्लेख के लायक है,इस से पहले मैदान Lulu के बीच छह स्तंभों को जो बहरीनी प्रदर्शनकारियों का सभा स्थल थी अल खलीफा ने यातायात की सुविधा के बहाने नष्ट कर दिया और यह मुद्दा पता चलता है कि बहरीनी सरकार इस तरह के उपायों के साथ सहमति थी और सउदी सिफारिशों को लागू करने के लिऐ कोई झिझक नहीं है.
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