कला व संस्कृति विभाग:"मोहम्मद रज़ा Qzalsfly"सिएरा लियोन में ईरान के सांस्कृतिक विमर्श,ने Iranology और इस्लाम शिनासी कक्षाओं के भाग में Shaban की ईदों व इमाम हुसैन (अ.स)के जन्म तिथि की ओर इशारा करते हुऐ कहाःसैय्यदुश्शुहदा के आंदोलन का परिणाम मानव व इस्लामी मूल्यों के आधार पर नैतिकता का पाठ था.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन शाखा,उन्हों ने अपने कलास के ऐक हिस्से इस्लाम में इमाम हुसैन (अ.स) की स्थिति के बारे में बताते हुऐ कहा कि इमाम हुसैन (अ.स)के आंदोलन ने उमवीयों के भीषण तत्वों को तोड़ दिया और बनी उमय्यह के आपराधिक शासकों को जो जाहिली निज़ाम के पुनर्जीवन के प्रयास कर रहे थे, बदनाम कर दिया.
Qzalsfly ने इस बयान के साथ कि इमाम हुसैन (अ.स)के आंदोलन ने सोऐ हुऐ ज़मीर को जगा दिया और कहाःदुनया के मुसल्मानों के तीसरे इमाम व उनके बावफ़ा साथियों की शहादत ने अध्यात्मिक रूप से मुसल्मानों की आत्मा व रूह पर गहरा असर डाला और ऐक नया ऐख़्लाक़ मानव व इस्लामी मूल्यों के आधार पर पेश किया.
उन्हों ने अपने लेक्चर में जारी रखते हुऐ इस बयान के साथ कि कुछ मुसलमानों की आदत थी कि धर्म और अपनी अंतरात्मा को कम कीमत पर बेच देते और दुष्टों के सामने अपनी गर्दन झुका देते थे, कहाःमुसल्मानों ने इमाम हुसैन(अ.स)की शहादत से यह सीखा कि ऐक सच्चा मुसल्मान, अचल जीवन और सभ्य मृत्यु के बीच, सम्मान के साथ मौत को अपमान के साथ रहने पर प्राथमिकता देता है,और अपने धर्म को एक छोटी सी चीज़ से बेचना नहीं चाहिए.
उन्होंने अपने भाषण में हज़रत Abolfazl(अ.स)और इमाम सज्जाद(अ.स.) के गुण और महानता को भी वर्णित किया.
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