ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) ने जानकारी साइट"अल आलम"के अनुसार बताया कि अब्दुल इलाहल माहौज़ी ने मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि अल खलीफा शासन ने कई दशकों से बहरीन की राजनीतिक और धार्मिक शख्सियतों और विद्वानों का अपमान करने के प्रयासों जैसे इस देश के शियों के रहबर आयतुल्ला"ईसा कासिम, के साथ किया गया है और 14 फरवरी को बहरीन में भी यह प्रयास जारी है.
बहरीन के इस राजनीतिक कार्यकर्ता ने बात जारी रखते हुए कहा: कि धार्मिक शख्सियतों में से एक'शेख अब्दुल अमीर अल जमरी नब्बे के दशक की क्रांति में थे आले खलीफा ने उन्हे आजीवन कारावास का फैसला जारी किया था यद्यपि कि 2000 में आज़ाद किया गया
उन्होंने यह भी कहा: कि 14 फ़रवरी की क्रांति की शुरूआत से बहरीन के अखबारों और सरकारी मीडिया ने टेलीविजन नेटवर्क ने फितने की साज़िश के साथ बहरीन के प्रमुख धार्मिक और राष्ट्रीय शख्सियतों में से'अयातुल्ला ईसा क़ासिम'को लक्षित क़रार दिया गया है
अलमाहूज़ी ने जोर देकर कहा कि धार्मिक हस्तियों की मानहानि आग के साथ खेलना है कहा: कि अगर आयतुल्लाह कासिम के साथ आपराधिक की सूरत में अपमान किया तो सख्ती के साथ निपटा जाएगा.
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