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लीबिया की क्रांति, और लोगों का क़याम इस्लाम और स्वतंत्रता के लिए था

14:37 - August 28, 2011
समाचार आईडी: 2178118
इंटरनेशनल ग्रुप: कल 26 अगस्त शुक्रवार को त्रिपोली की मस्जिद"मीज़रान"के इमामे जमात ने जुमे की नमाज़ के उपदेश में कहा कि लीबिया 42 साल बाद कोमे से जागा है और क्रांतिकारी देश के इस्लाम पर लौटने और आजादी हासिल करने के लिए लड़े हैं
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA)ने जानकारी साइट«romandie»के अनुसार बताया कि लीबिया के प्रसिद्ध ओलमा में से शेख «वानीस मबरूक"कि जो इस देश की क्रांतिकारियों की श्रेणी में हैं कल गद्दाफी की तानाशाही के ख़त्म होने के बाद त्रिपोली के पहले नमाज़े जुमा में हज़ारों नमाज़ियों की उपस्थिति में घोषणा की कि लीबिया की क्रांति एक चमत्कार है ख़ुदा वन्दे आलम ने हमें अत्याचार से छुटकारा दिलाने में मदद की है और लीबिया के लोगों का क़याम इस्लाम की शिक्षाओं पर दोबारा लौटने और स्वतंत्रता प्राप्त करने के उद्देश्य से कामयाब हुआ है
उन्होंने आगे कहा कि लीबिया की क्रांतिकारियों और लोगों की जीत पर बधाई के साथ मैं इस बात की तरफ इशारा करना चाहता हूँ कि संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है लीबिया 42 साल बाद कोमा से बाहर आया है और अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय परिषद के अनुपालन के साथ देश को विकास की तरफ ले जाऐं
त्रिपोली की मस्जिद के इमामे जमात ने अपने भाषण के अन्य भागों में कहा: कि गद्दाफी शासन के प्रशंसकों से हम चाहते हैं कि वह हथियार डाल दें और आत्मसमर्पण करें ताकि युद्ध का अंत किया जा सके
उन्होने अंत मे इस बात को दोहराते हुए ज़ोर दिया: कि एक क्रांतिकारी जब इस्लाम और आजादी के लिए लङता है तो पीछे नहीं हटता और कोई भी शक्ति क्रांतिकारियों को पथ से नहीं हटा सकती.
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