अंतर्राष्ट्रीय समूह:प्रमुख मूमेंट"किफ़ायह" मिस्र के सदस्य,ने काहिरा में सऊदी दूतावास पर हमले को देश के लोगों द्वारा 25 जनवरी की मिस्री क्रांति में आले सउद शासन के रुख और उसकी दख़ालत पर गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त करना और ऐक चेतावनी बताया .
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA)सूचना केन्द्र अल आलम न्यूज नेटवर्क के हवाले से, "करीमा हफ़्नावी" ने परसों, 10 सितम्बर, को समाचार चैनल अल आलम के साथ एक साक्षात्कार में कहाः मिस्री राष्ट्र चाहता है कि सऊदी अरब के मिस्र में 4 अरब डॉलर निवेश को रद्द करने और इस देश से मिस्री कर्मचारियों वापस बुला कर रियाद की दखालत के खिलाफ सख़्त रुख़ अपनाया जाऐ.
प्रमुख मूमेंट"किफ़ायह" मिस्र के सदस्य ने मुबारक के मुहाकमे के सुस्त होने और उसकी सम्पति को बाहर निकालने तथा उसके परिवार को देश से बाहर भेजने में सऊदी अरब की भूमिका पर बोलते हुऐ बल दिया और कहा मिस्री क़ौम के क्रोध के तीर का निशाना हर वह होगा जो उसकी क्रांति के मुक़ाब्ले में आऐगा और वह स्पष्ट रूप से सऊदी अरब, यहूदी और अमेरिकी हैं.
हफ़्नावी ने कहा जन आंदोलन, मिस्री मामलों मे सऊदी दख़ालत को रोकने के लिऐ प्रभावशाली सबब है और उसका संदेश सीमाओं से आगे तक जाता है आंकड़े बताते हैं कि 25 जनवरी की क्रांति के बाद कई यहूदी बसने वाले मक़्बूज़ा फ़िलिस्तीन से बाहर चले गए है.
858313