IQNA

अपमानजनक धारावाहिक "अल हसन और अल हुसैन(अ.स.)"में आशूरा की संस्कृति को लक्षित किया गया हैः

6:38 - September 21, 2011
समाचार आईडी: 2190976
कला और संस्कृति विभाग:Hojjatoleslam Rezaee ने अपमानजनक धारावाहिक अल्मावियह,हसन और हुसैन की समीक्षा बैठक में कहाःइस फिल्म के निर्माता यह चाहते है कि इमाम हुसैन(अ.स) और उनके साथियों के लिए शोक की परंपरा को शियाओं से छीन लें.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) हौज़ऐ इल्मियह शाखा,Hojjatoleslam Rezaee,विद्वान और समीक्षक ने अपमानजनक सीरियल अल्मावियह,हसन और हुसैन की समीक्षा बैठक में जो कल 19 सितम्बर को Qom जामेअतुलमुस्तफ़ा(PBUH)में आयोजित की गयी कहाःअगर दुश्मन ने हमें अवसर दिया है कि हम उसमें अपने धर्म को बयान करें तो इन सिद्धांतो और उसूलों को बयान करना हमारा धार्मिक कर्तब्य है.
Rezai ने कहा धारावाहिक मावियह, हसन और हुसैन,ने हमारे लिए एक अवसर पैदा कर दिया है ता कि इस श्रृंखला के बारे में हम अपनी राय व्यक्त करें.
विज्ञान के मास्टर ने कहा कि इस सीरयल के मुख्य प्रायोजक महा कम्पनी है जिस इस फिल्म को 4 से 5 साल में आठ अरब डॉलर खर्च करके बनाया है.
Rezai, जो इस प्रकरण के बारे में बहुत कुछ आलोचना कर रहे थे कहाः इस फिल्म में कोशिश की गई है कि अभिनेताओं और फ़िल्म में रिकॉर्डिंग स्थानों में सब को अरबी देशों में चुना जाऐ और मिस्र को छोड़कर सभी अरबी देशों ने इस फ़िल्म को बनाने में योगदान किया है.
उन्होंने कहा कि यह सीरयल, तय था कि इस वर्ष रमजान में अरबी देशों के 13 राष्ट्रीय नेटवर्क और उपग्रह से प्रसारण की जाऐ, लेकिन मुस्लिम विश्व में विरोध प्रदर्शन करने के कारण केवल 8 उपग्रह नेटवर्क और कुछ स्थानीय नेटवर्क में प्रसारण सीमित होगया.
उन्होंने कहा कि इराक़ के राष्ट्रीय नेटवर्क से यह फिल्म कुछ दिनों के लिऐ प्रसारित की गई, लेकिन कुछ दिनों के बाद प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन लेबनान, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों में यह प्रसारित की गई.
इस शोधकर्ता ने इस श्रृंखला के साथ सहमत और असहमत के हवाले से कहाःइस अपमानजनक सीरयल के बारे में कुछ प्रतक्रियाऐं ब्यक्त की गईं जिनमें ऐक दुनियाऐ शीयत से थी कि ईरान, मिस्र, इराक और अन्य देशों से शिया मुस्लिम विद्वानों ने इसके प्रसारण को लेकर आपत्ति ब्यक्त की.
उन्हों ने कहा कि कुछ सुन्नी उलमा ने भी इसका विरोध किया लेकिन सलफ़ी अतिवादी ,व सलफ़ी उदारवादी व कुछ सुन्नी बुद्धिजीवियों ने इसका समर्थन किया जैसे कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को के देशों में प्रत्यक्ष समर्थन किया गया, और सऊदी अरब भी परोक्ष रूप से समर्थन करने वालों में शामिल होगया.
863983
captcha