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हज़रत इमाम खु़मैनी(र.) के हकीमाना नेत्रत्व ने इस्लामी क्रांति को अन्य क्रांतियों से अलग कर दिया हैः

5:31 - October 03, 2011
समाचार आईडी: 2197659
सामाजिक, राजनीतिक समूह: इस्लामी संबंध और संस्कृति संगठन के अध्यक्ष ने 29 सितम्बर को Zainabiyya क्षेत्र सीरिया में विश्व जामेअतुल मुस्तफ़ा (PBUH)और हौज़ऐ इल्मियह इमाम खु़मैनी के विद्वानों के बीच कहाः कि वह बात जो ईरानी इस्लामी क्रांति को हाल के आंदोलनों से अलग कर देती है हज़रत इमाम खु़मैनी (र.) का हकीमाना नेतृत्व है.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन शाखा के हवाले से, "मोहम्मद बाक़र Khorramshad" इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन के प्रमुख ने Zainabiyya क्षेत्र सीरिया में विश्व जामेअतुल मुस्तफ़ा (PBUH) सथल में उपस्थित होकर इस विश्वविद्यालय और मदरसा इमाम ख़ुमैनी के छात्रों में 29 सितम्बर को बात की.
इस समारोह में हुज्जतुल इस्लाम " इब्राहीम अन्सारी" अरबी व अफ़्रीक़ी संगठन के सांस्कृतिक प्रबंधक व " अली ख़य्यात" हमारे देश के सांस्कृतिक विमर्श भी उपस्थित थे,Khorramshad ने इस्लामी दुन्या और इस्लामी देशों मे हाल के आंदोलनों व इस्लामी जागृत की ओर इशारा करते हुऐ इन क्रांतियों को गरिमा और सम्मान और खोई हुई पहचान की खोज से संबंधित जाना.
उन्हों ने आगे फ़्रांस व रूस की क्रांतियों,या विश्व के दूसरे क्षेत्रों मे सफ़ेद व मख़्मली इन्क़ेलाबों की ओर इशारा करते हुऐ कहाःजो कुछ आज क्षेत्र में होरहा है खोई हुई पहचान व कल्च्रल की तलाश, इस्लामी बुन्यादों की ओर वापसी और सारांश के तौर पर इस्लामी जागृत है.
इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन के प्रमुख ने बात को आगे बढ़ाते हुऐ कहाःइस्लामी जागृत का पहला चरण 150 साल पहले सैयद जमालुद्दीन असदाबादी के दौर में शुरू हुआ था और फिर इस प्रश्न को सामने रखा कि क्यों इस्लामी दुन्या में यह आंदोलन देर से शुरू हुऐ और पश्चिम हम से आगे निकल गया और इसका जवाब उन्हों ने यह दिया कि यह देश इस्लाम व उसकी शिक्षाओं से दूर होगऐ थे.
उन्होंने इमाम खु़मैनी के नेतृत्व में इस्लामी क्रांति को इस्लामी जागरण की दूसरी लहर बताया कि पश्चिमी शत्रुता की सभी बाधाओं के बावजूद सर्वशक्तिमान ईश्वर और लोगों पर भरोसा पर करने के साथ अपनी प्रगति जारी रखे है.
इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन के प्रमुख ने अंत में ईरानी इस्लामी क्रांति और हाल की क्रांतियों की समानताओं(जैसे के सम्मान और गरिमा के रूप में, अत्याचार से मुक़ाब्ला व इस्लाम परआधार आदि )की ओर इशारा करते हुऐ कहाःकि जो चीज़ ईरानी इस्लामी क्रांति को हाल के आंदोलनों से अलग कर देती है हज़रत इमाम खु़मैनी (र.)का हकीमाना नेतृत्व था कि अपने तय कार्यक्रमों व उद्देशों से लोगों को अपने बाद के लिऐ ऐक जुट कर दिया.
यह बताना भी ज़रूरी है कि अंत में Khorramshad ने दर्शकों के सवालों के जवाब दिए.
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