ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA)समाचार एजेंसी इबा के अनुसार, "अली जुमा" मिस्र के मुफ्ती,ने जो लोग अहलेबैत(अ.स)और अवलियाऐ इलाही तथा मुस्लिम विद्वानों की क़ब्रों के विनाश पर आमंत्रित कर रहे हैं उनका विरोध करते हुऐ कहाः यह निमंत्रण ग़लत समझ की वजह से दिऐ जाते हैं और इस्लाम के चेहरे को बिगाड़ने अथवा कट्टरपंथ की ओर आमंत्रित करने की कोशिश है.
अली जुमा ने आगे कहा: अल्लाह के मैसेन्जर (PBUH) ने हमें सिखाया है कि कुछ कब्रों और ज़रीहों के विरोध हिंसा धर्म,अक़्ल और मानवता से बाहर होना है और जो इस तरह की हिंसा को अंजाम दे अनभिज्ञ आदमी है.
मिस्र के मुफ्ती ने कहा:कुछ लोग है जो मुसलमानों को मुश्रिक कहते हैं और अहलेबैत की ज़रीहों को मूर्ति बताते हैं, जबकि नबी अकरम भी ज़रीह रखते हैं, इस कारण अगर कोई चाहता है कि इन ज़रीहों को ख़राब करे तो उसके जवाब हम कहते हैं "गूंगा होजा,भगवान तेरी ज़बान,हाथों और पैरों को काट डाले, क्या तू चाहता कि पैगंबर का अपमान करे?
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