ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) लेबनान प्रकाशित समाचार पत्र "सफ़ीर» के हवाले से, बहरीनी सुरक्षा बलों ने परसों आंसू गैस का उपयोग करके बहरीनी लोगों को मनामा जाने वाली सड़कों पर ग्रामीण व अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को जो क्रांति की सालगिरह का जश्न मनाने के लिए मैदाने लूलु(शुहदा)की ओर आरहे थे दृढ़ता से दबा दिया.
"हमद बिन ईसा आले खलीफा," बहरीन के राजा, बहरीनी नागरिकों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के जवाब में इस देश में एक नए चरण की शुरुआत बताया और जमीअते इस्लामी "वफ़ाक़ मिल्ली" बहरीन ने अपनी टिप्पणी में कहाः आले ख़लीफा ने तानाशाही को अपनी राजनीति का सहारा बना रखा है.
दो ऐना गवाहों की रिपोर्ट के आधार पर: सैकड़ों बहरीनी कार्यकर्ताओं ने परसों कफ़ पहन कर मनामा की सड़कों पर,जब कि देश के झंडे हाथों में उठाऐ थे सत्तारूढ़ शासन के खिलाफ नारे लगा रहे थे और हमद बिन ईसा आले खलीफा के सत्ता छोड़ने का मुतालिबा कर रहे थे.
इसी तरह, गवाहों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के एक समूह को जो 500 वर्ग मीटर मैदाने लूलु तक पहुच गऐ थे आंसू गैस और ध्वनि बम के ज़रये तितर बितर कर दिया.
14 फरवरी युवा गठबंधन बहरीन और जमीअते इस्लामी "वफ़ाक़ मिल्ली" ने मैदाने लूलु के लौटाने पर बल दिया और इस मैदान का नाम " मैदाने शुहदा " रखने की अपील की.
जमीअते इस्लामी वफ़ाक़ मिल्ली ने इसी तरह ऐक बयान करके बल दिया: बहरीनी सुरक्षा बलों ने परसों उन क्षेत्रों में जहां तनाव और प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष था कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया कि एक उन कैदियों में महिला भी थी.
इस जमीअते इस्लामी ने कहा कि बहरीनी अधिकारियों की तानाशाही और निरंकुशता दिन ब दिन तेज़ होती जारही है और सत्तारूढ़ शासन ने सरकार के स्तंभों को स्थिर करने के लिऐ बजाय राजनीतिक समाधान के, आग और लोहे की भाषा में शरण ली है.
जमीअते इस्लामी वफ़ाक़ मिल्ली ने इसी तरह देश के राजा से अनुरोध किया कि लोगों की मांगों को सुनें और हित समूहों को अनुमति न दें कि देश की गंभीर स्थिति से ग़लत फायदा उठाऐं.
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