ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) वेबसाइट «businessnews» के अनुसार, सहबी अतीक़, ने परसों ट्यूनीशियाई संसद में एक भाषण के दौरान देश के नए संविधान को बनाने के संबंध में, अपने भाषण का अधिक से अधिक भाग धर्म और राजनीति के साथ होने की आवश्यकता की रक्षा पर आवंटित रखा.
उन्हों ने कहाःट्यूनीशिया का नया संविधान पवित्र कुरान और सुन्नते नबवी (स.व.) की शिक्षाओं पर आधारित होना चाहिए:जो लोग इस्लामी इतिहास से परिचित हैं यक़ीन करेंगे कि धर्म और राजनीति कभी भी ऐक दूसरे से अलग नहीं हैं क्यों कि इस इलाही धर्म में धार्मिक बातें केवल इंडूज्वल मुद्दों पर समाप्त नहीं होते बल्कि सारे उसूल ऐक समाज के लिऐ बनाऐ गऐ है इस लिऐ राजनीति,इस्लाम में बिना धर्म के बे अर्थ के है.
ट्यूनीशियाई संसद के सदस्य ने बल दिया: जो लोग धर्म की राजनीति से जुदाई की आवाज़ लगा रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए कि इस काम से वह ऐक इस्लामी सिद्धांत पर वार कर रहे हैं जो किसी हालत में स्वीकार नहीं है.
अंत में उन्होंने कहा: इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी राय ट्यूनीशिया में धार्मिक राज्य का गठन किया जाना चाहिए,है बल्कि सरकार लोकप्रिय और उसका संविधान इस्लामी होना चाहिए.
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