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योग के आध्यात्मिक नियमों पर आधारित इरफान, भौतिक और दुनयावी हैः

4:54 - March 20, 2012
समाचार आईडी: 2293893
चिंतन समूह: हौज़ ए इल्मिया और विश्वविद्यालय के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन डॉक्टर मोहम्मद तक़ी फ़आली ने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि मकतब योग के पयरोकार समझते हैं कि सबसे अधिक बासमझ वह है जो अधिक ऊर्जा रखता हो विचार किया है कि योग पर आधारित इरफान और आध्यात्मिक दुनयावी और भौतिक है.
ईरान की क़ुरआंनी समाचार एजेंसी(IQNA)की रिपोर्ट के अनुसार हौज़ ए इल्मिया और विश्वविद्यालय के शिक्षक और नई जन्म लेने वाली आध्यात्मिक आंदोलनों के बारे में 9 पुस्तकों के लेखक हुज्जतुल इस्लाम और वल मुस्लेमीन मोहम्मद तक़ी फ़आली ने छात्रों की कुरान गतिविधियों के राष्ट्रीय संस्थान में आयोजित होने वाली "झूठे इरफान की आपदा से आशनाई" विषय पर चौथी बैठक में इस विचारधारा की आलोचना समीक्षा करते हुए संबोधित किया है.

इस शोधकर्ता ने इस बात पर जोर देते हुए कि "निर्वाण" बौद्ध के संविधान का ऐक आध्यात्मिक मफ़हूम है स्पष्ट किया है कि बौद्ध का यह विश्वास था कि अगर इंसान मुश्किल और कठिन प्रकार की रयाज़तें करे तो आखिरकार "निर्वाण" नामक स्थिति तक पहुँच जाता है. भारतीय व बौद्ध की संस्कृति में "नरवाना" की कई और विभिन्न प्रकार की तफसीरें की गई हैं जिनमें से एक आंतरिक चुप्पी या सुकूत बातिनी है.

हुज्जतुल इस्लाम फ़आली ने कहा है कि "नयरवान" को नफ़्सानी आराम और सुरूर से ताबीर किया जा सकता है. अगर इंसान विसाल हक़ यानी एक गहन आध्यात्मिक स्थिति पैदा कर ले और बातिनी आराम के समनदर में गोता लगा ले तो इस स्थिति को "निर्वाण "कहा जाएगा, दूसरी ताबीर में मनुष्य के अंदर आध्यात्मिक बिंदु के चरम का नाम" निर्वाण "है. इस बयान के माध्यम से हम नतीजा निकाल सकते हैं कि योग ऐक इरफानी मकतब है न कि व्यायाम का स्टाइल और" निर्वाण "की स्थिति हमारे इस अर्थ पर शाहिद है.

उन्होंने योग के आठ चरणों की ओर इशारा करते हुए कहा: यह आठ चरण अपने सबसे सीटस के साथ लगभग चालीस चरण बनते हैं जो बहुत सी टेक्निक्स जैसे झुकना, लेटना, चलना, खड़ा होना, लगातारसांस लेना आदि शामिल हैं. जैसे " पानानजली "कहता है कि मनुष्य सांस लेने के दौरान विश्व की" पुराण "नामक सकारात्मक ऊर्जा को बाहरी दुनिया से अंदर ले कर जाता है और सांस छोड़ते समय अपनी नकारात्मक क्षमताओं को बाहर की दुनिया में स्थानांतरित करता है.

उन्होंने कहा: इसलिए श्वसन यानी सांस लेने और छोड़ने का ऐसी प्रक्रिया जिसके दौरान इंसान दुनिया की सकारात्मक क्षमताओं को लेता और अपने अंदर की नकारात्मक क्षमताओं को खुद से दूर करता है. मकतब योग के पयरोकार कहते हैं कि अगर इंसान सही तरीके से श्वसन की टेक्निक्स को जारी करे तो अपने अंदर के विभिन्न दर्दों और ग़मों से बच सकता है या कम से कम आंतरिक दर्द कम हो जाते हैं. इंसान का आंतरिक विभिन्न ग़मों, मनोवैज्ञानिक, मानसिक, फ़िक्री और अहसासाती दर्दों का सामना करना यह दलालत करता है कि इंसान सांस लेने के काम में ब्रह्मांड में ऊर्जा के प्रवाह से हम अंग नहीं है.

उन्होंने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि मैंने योग की शिक्षा पुस्तकों के इजमाली समीक्षा के दौरान सैकड़ों विभिन्न प्रकार की टेकनिक्स से आशानाई हासिल की है अपने विचार प्रकट किऐ हैं कि अगर कोई इन टेकनिक्स को सीखने के लिए दिन में पांच घंटे ख़र्च करे तो सभी टेकनिक्स शिक्षा के लिए उसे कई साल लगेंगे.

हुज्जतुल इस्लाम फ़आली ने कहा है: पानानजली कहता है कि पूरा विश्व ऐक ऊर्जा है. इसलिए शब्द "ऊर्जा" के साथ जो भी मफ़हूम और ताबीर जोड़ी जाए जैसे "ऊर्जा के समूह", "ऊर्जा चिकित्सा", "ऊर्जा चिकित्सक", "ऊर्जा के स्टोनज़ "," ऊर्जा की मोसीक़ियाँ "," ऊर्जा के प्रकाश "और इस प्रकार की अन्य तरकीबात जो आज ईरान में प्रसिद्ध हैं बेशक उनका स्रोत पानानजली का योग है.

उन्होंने यह बयान करते हुए कि ऊर्जा के मुद्दे पर चर्चा और तमहीस हमारे देश में योग के रवाज पर स्पष्ट तर्क है ताकीद की है पानाजली की आस्था की नज़र से सरासर ब्रह्मांड ऊर्जा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि ऊर्जा से उसका क्या मतलब है? वास्तव में ऊर्जा से उसकी मुराद फ़िज़ीकल मफ़हूम नहीं है बल्कि वह शब्द "ऊर्जा" को आध्यात्मिक दृष्टि से देखता है.

उन्होंने कहा है कि पानानजली का मानना है कि अपराध, शरीर और पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं है और पूरे का पूरा संसार ऊर्जा, और इस हुक्म में इंसान भी संसार के जुज़ के रूप में शामिल है इसलिए इनमें से पहली श्रेणी को पानानजली के योग की रो से संसार परिचित और दूसरी को मनुष्य परिचित कहते हैं.

उन्होंने इस बात को बयान करते हुए कि इंसान भी ऊर्जा का एक एकीकृत प्रणाली एकमात्र है स्पष्ट किया है कि इंसान ऊर्जा के सात भागों पर शामिल हैं पहला भाग, भौतिक है लेकिन शरीर पदार्थ नहीं है बल्कि ऊर्जा का मुतराकिम प्रणाली है, दूसरा हिस्सा ऐथीरीयल (बहुत सूक्ष्म), तीसरा भाग भावनाओं पर शामिल है, और आखिरी सातवां हिस्सा "निर्वाण" है.

उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कि यह सभी भागों कई और विभिन्न ऊर्जा रखते हैं स्पष्ट किया है कि ऊर्जा की सबसे कम मात्रा पहले हिस्से से जुड़ी है और व्यवस्थित अन्य भागों की ऊर्जा पहले से अधिक होगी किन्तु ऊर्जा का सबसे अधिक अनुपात सातवें चरण में "निर्वाण" से जुड़े है. पानानजली का विश्वास है कि "नयरवानी" क्षेत्र की ऊर्जा सभी ब्रह्मांड की ऊर्जा के बराबर है इसलिए सातवां हिस्सा सभी ब्रह्मांड के साथ कनेक्ट है.

पानानजली की तर्क में सबसे अधिक बा मारेफ़त वह है जिसके पास अधिक ऊर्जा होगी

हुज्जतुल इस्लाम फ़आली ने कहा: उल्लेखनीय है कि पानानजली की आस्था की रो से उक्त हिस्से इंसान के अंदर इस तरह आपस में कनेक्ट हैं कि हर हिस्सा अपने से नीचे वाले हिस्से को कवर और उस की देखरेख करता है. दिलचस्प बात यह है कि पानानजली की आस्था में मनुष्य की अपनी प्रतिभा, पवित्रता ज़रीफ़ अहससात के साथ साथ आध्यात्मिक सुरूर से लाभ लेना शीर्ष भागों से संबंध रखता है. अगर इंसान शीर्ष भागों में स्थानांतरित हो तो अपनी प्रतिभा, समझ और मारेफ़त से अधिक लाभ उठा सकता है.

उन्होंने कहा है उक्त फार्मूले के तहत यह बात साबित होती है कि सिस्टम में सबसे अधिक बुद्धिमान वह है जो ऊपर वाले हिस्से की ऊर्जा से लाभ उठा सके. इसी तरह सबसे बड़ा आरिफ़ वह है जो सबसे अधिक ऊर्जा रखता हो. यह कानून हालीवूड की कई फिल्मों में नज़र आता है जिसे कथित सिनेमा की बहस में बयान किया जाएगा.

शिक्षक फ़आली ने कहा है कि शुद्ध धार्मिक और कुरानी इरफान की बहस में वर्णित है कि आरिफ़ इस को कहेंगे जो म्बदऐ हस्ती के साथ अधिक एकीकृत है. धार्मिक ताबीर में मनुष्य जितना बड़ा अंतरंग होगा वह उतना ही बड़ा आरिफ़ होगा. अब जितना भी शुद्ध इस्लामी दृष्टि और योग की इरफानी नज़र में अंतर दिखाई देगा उतना ही हम इस्लामी इरफान और इरफान योग के बीच अंतर को जान सकेंगे.

उन्होंने अंत में कहा: यह दावा कि सबसे बड़े आरिफ़ वह है जो अधिक ऊर्जा रखता हो वह जमीनी, खाकी, भौतिक और दुनयावी इरफान है किन्तु यह दृष्ट कि सबसे बड़ा आरिफ़ वह है जो निर्माता हस्ती से नज़दीक तर हो इलाही और कथित इरफान है.

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